माहे रमजान में नन्हे रोजेदार भी डूबे हैं इबादत में
भिलाई
माहे रमजान के दौरान बच्चे भी अपनी भूख-प्यास के भूल रोजा रख रहे हैं और नमाज व दीगर इबादत पूरी कर रहे हैं। इन बच्चों में ज्यादातर ऐसे हैं,जिन्होंने पहली बार रोजा रखा है लेकिन गर्मी के इस मौसम में इन्हें घर पर रहते हुए रोजा रखना मुश्किल नहीं लग रहा है। इन बच्चों का कहना है कि घर के बड़े लोगों को देखकर उनमें भी रोजा रखने का शौक पैदा हुआ और पूरी पाबंदी से इसे पूरा कर रहे हैं। ये बच्चे घरों में रहते हुए अपनी इबादतों में दुनिया में अमन व सलामती के साथ-साथ पूरी दुुनिया से कोरोना महामारी की खात्मे के लिए खास तौर पर दुआएं कर रहे हैं।
सेक्टर-7 निवासी आबान खान और उनकी बहन अयाना खान बताते हैं कि रमजान में घर वालों के साथ सुबह सवेरे उठ कर सेहरी करना, नमाज पढ?ा और शाम को मिल कर इफ्तार करना उन्हें अच्छा लगता है। आबान का कहना है कि रोजे के दौरान उन्हें शुरू-शुरू में थोड़ी परेशानी लगी लेकिन फिर आदत हो गई और भूख-प्यास की तरफ ध्यान नहीं गया।
पुलिस लाइन दुर्ग निवासी अरमान खान और अलविना खान इस साल पाबंदी से रोजा रख रहे हैं। अरमान बताते हैं कि दोनों भाई बहन पूरे रोजे तो नहीं रख पाए और कुछ छूट भी गए हैं। फिर भी घर में सुबह सेहरी के वक्त से लेकर शाम को अफ्तार के वक्त तक और उसके बाद रात में भी इबादत सब मिलजुल कर किया करते हैं। दोनों भाई-बहन का कहना है कि रोजा रखने पर उन्हें भूख-प्यास की तरफ ध्यान नहीं जाता है, इसलिए पूरी पाबंदी के साथ रोजा रख पाते हैं।
सेक्टर-7 निवासी अनाबिया शेख और इनाया शेख रोजा रखने के साथ-साथ नमाज भी पूरी पाबंदी से पढ़ रही हैं। अनाबिया-इनाया का कहना है कि माहे रमजान में रोजा रखने के अलावा तमाम इबादतों का भी ध्यान रखतीं हैं। वहीं शबेकद्र की रात जागकर भी दोनों ने खूब इबादत की है। दोनों का कहना है कि रोजा रखने पर उन्हें भूख-प्यास का एहसास नहीं होता है। राजनांदगांव निवासी अनम खान और अजान खान को रोजा रखने के साथ-साथ परिवार के साथ मिलकर सेहरी व अफ्तार करना खूब भाता है। अनम बताती हैं कि दोनों भाई-बहन घर में मम्मी-पापा व दादी के साथ मिल कर इबादत करते हैं। अनम ने बताया कि उन्होंने शबेकद्र की रात भी इबादत की और बाकी दिनों में भी पूरी पाबंदी से इबादत करती हैं।
