कोविड-19 के मुश्किल दौर में हुआ जीवन को समझने का अनुभव- नर्स नेहा

दुर्ग
चंदुलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के कोविड केयर सेंटर में एक महीने से कोविड-19 के लिए स्पेशल ड्यूटी पर तैनात स्टॉफ नर्स नेहा सागर कोविड वार्ड में त्याग की भावना से मरीज की देखभाल कर रही  है। नाइट शिफ्ट की ड्यूटी करने वाली नर्स अपनी नींद भुलाकर मरीजों की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ती है।

नेहा बताती है नर्स की नौकरी में सेवा भाव का ऐसा जुनून था कि जब खुद का परिवार लेने का वक्त आया तो स्वार्थ त्याग कर परमार्थ को चुनने में हिचक नहीं किया। उन्होंने बताया पेट का इलाज के लिए चिकित्सक ने आॅपरेशन का सलाह दिया था। जब आॅपरेशन कराने का समय मिल गया था तभी स्वास्थ्य विभाग से सूचना मिली की कोविड केयर सेंटर में डयूटी पर उपस्थित होना है। ऐसे मुश्किल वक्त में अपना हित त्याग कर सेवा का रास्ता चुना और आज एक महीने से चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल में डयूटी पूरी ईमानदारी से निभा रही है। नेहा बताती हैं जब कोविड अस्पताल में 12 अप्रैल को ज्वाइंन किया तब हर दिन 25 से 30 मृत्यु चंदुलाल चंद्राकर कोविड डेडीकेडेट अस्पताल में हुआ करती थी। लेकिन अस्पताल के मेडिकल टीम और 24 घंटे के सेवा में तत्पर रहने से आज मौत के आंकड़े शून्य की ओर होते चली गयी है। अस्पताल के मेडिकल नोडल आॅफसर डॉ अनिल कुमार शुक्ला के मार्गदर्शन में पूरा स्टॉफ एक परिवार की तरह मिलकर कार्य करते हैं।

नर्स के प्रोफेशन के बारे में नेहा बताती हैं कि मरीज के लिए अस्पताल में सबसे ज्यादा नर्सिंग स्टॉफ के सेवा भाव से दवाओं का असर ज्यादा होने लगता है। इस महामारी के दौर में जब कोई मरीज अस्पताल के वार्ड में अपने बेड में होता है तो उनके साथ परिवार को कोई सदस्य भी नहीं होता है। ऐसे में वक्त में कोविड-19 महामारी से जुझते हुए लोगों को एक नर्स ही मरीज की शारीरिक पीड़ा को अच्छी तरह समझ कर उन्हें बीमारियों से लड?े का एक मानसिक जज्बा भी देती हैं। ये बात सच है कि एक मरीज का इलाज डॉक्टर करता है, मगर उस मरीज की देखभाल नर्स करती है।

नेहा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक महीने से परिवार से दूर हॉस्टल में रहकर डयूटी करनी पड़ रही है। लोग कोविड से संक्रमित होकर पॉजिटिव आते हैं। ऐसे में अपनों से दूर रहकर पॉजिटिव सोच बनाकर मरीज इलाज कराकर स्वस्थ्य होकर घर लौट रहे हैं।  नेहा का मानना है कि कोविड-19 से लड़ाई में हम सभी को मिलकर आगे आने की जरुरत है तभी हम डेथ रेट को शून्य पर ले जा सकते हैं। एक नर्स में मरीज के दर्द और तकलीफों को समझने की काबिलीयत होनी चाहिए और दिल से उसकी मदद भी करनी चाहिए। मरीज के साथ अपनेपन और धीरज से पेश आना चाहिए। नर्स डे हम उनके इसी जज्बे को सलाम करते है। नेहा की पदस्थापना बेमेतरा जिले के नवागढ ब्लॉक के ग्राम कटई स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 5 साल से हैं। नेहा का ससुराल रायपुर में है। वह अपने मां-बाप की देखभाल करते हुए नवागढ में रहती है। मां को स्पाइनल इंज्यूरी होने से उनका देखभाल करने की जिम्मेदारी भी नेहा को निभानी होती है।

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