नकली रेमडेसिविर मामले में बिल्डर सरबजीत सिंह मोखा सलाखों के पीछे

जबलपुर
कोरोना संक्रमित मरीज के लिए ‘जीवन रक्षक दवा’ के रूप में इस्तेमाल में हो रहे रेमडेसीविर इंजेक्शन में फर्जीवाड़ा करने वाले सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा को पुलिस ने सेंट्रल जेल भेज दिया है। सरबजीत सिंह मोखा के आईसीयू से सीधे जेल पहुंचने के पहले ही जेल प्रशासन मुस्तैद था। गेट के बाहर जेल कर्मियों के बीच भी इस बात की चर्चा रही है कि ऐसे संकटकाल में भी लोग रूपए कमाने के लिए लोगों के जीवन से खेल रहे हैं। मोखा पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए हर व्यक्ति सोशल मीडिया में प्रतिक्रिया व्यक्त करने सक्रिय है। इससे पहले मोखा फर्जीवाड़े व धोखा देने के आरोप में दो बार जेल की हवा खा चुका है।

जबलपुर आए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा यह कहने के बाद कि नकली इंजेक्शन व दवा बेचने वाला जानवर से भी बद्तर है, पुलिस व प्रशासन ने तेज कार्रवाई करते हुए सरबजीत सिंह मोखा को उस समय गिरफ्तार किया जब वो अपने ही अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हो गया था। तीसरी बार जेल की सलाखों के पीछे जाने वो मोखा ने फर्जीवाड़ा करते हुए एलआईसी से बिना मकान के फर्जी लोन लेकर बिल्डरशिप का कार्य शुरू किया था। फर्जी लोन के मामले में 1991 में मोखा के खिलाफ अपराध दर्ज हुआ, जिसके बाद उसे जेल भेजा गया था। कुछ माह जेल में रहने के बाद मोखा का यह केस रफा-दफा हो गया। जेल से बाहर निकलने के बाद मोखा का शहर का बड़ा बिल्डर बन गया। सरबजीत सिंह मोखा दूसरी बार भैंसासुर मार्ग में परेरा परिवार के मकान में अवैध कब्जा करने के मामले में जेल गया। इस मामले की गूंज जबलपुर से भोपाल तक रही। रसूखदार मोखा को बचाने के लिए शहर के बड़े नेता सक्रिय हुए, जिसके बाद मोखा जेल से रिहा हुआ। कुछ सालों तक बिल्डिंग बनाने का कार्य करने के बाद मोखा ने सिटी अस्पताल खोला था।

नकली रेमडेसीविर इंजेक्शन के मामले में सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा एवं देवेश चौरसिया से पूछताछ के लिए आज देर रात तक गुजरात पुलिस इंदौर से जबलपुर पहुंचेगी। गुजरात पुलिस मोखा से पूछताछ करते हुए प्रोडक्शन वारंट पर गुजरात लेकर भी जा सकती है।  

एक मई को गुजरात पुलिस ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था। इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ के आधार पर 6 मई को जबलपुर के आशा नगर निवासी सपन जैन को गुजरात पुलिस गिरफ्तार कर ले गई थी। सपन जैन, सिटी अस्पताल के कर्मी देवेश चौरसिया और इंदौर में गिरफ्तार क्षितिज राय, यश मेहंदी और विजय सहजवानी ने सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत मोखा की भूमिका को उजागर कियां था। मोखा ने 23 व 28 अप्रैल को गुजरात की नकली फर्म से 2 कॉर्टून इंजेक्शन अम्बे ट्रांसपोर्ट के माध्यम से वाया इंदौर मंगवाया था। सरबजीत सिंह मोखा पर हुई एफआईआर के बाद उसके गिरफ्तार कर एनएसए के तहत निरुद्ध किया गया है।  

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मामले में फंसे सिटी अस्पताल के संचालक सरबजीत सिंह मोखा पर केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना सीजीएचएस ने सख्ती दिखाई है। सीजीएचएस के हितग्राहियों को लगातार परेशान करने की खबरों के बाद मोखा पर एफआईआर होते ही सीजीएचएस ने सिटी अस्पताल को पृथक कर दिया है।  सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन व कई पीड़ित सीजीएचएस लाभार्थियों की शिकायत के बाद सिटी अस्पताल पर कार्रवाई करते हुए मोखा के अस्पताल को सीजीएचएस पैनल्ड से सस्पेंड कर दिया गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा ने बताया कि उक्त अस्पताल की कई बार शिकायतें अपर निदेशक से लेकर दिल्ली तक की गई थी,बमुश्किल अधिकारियों ने यह कार्रवाई की है। इससे उन पीड़ितों को राहत है जो कि पात्र हितग्राही हैं।

उल्लेखनीय है कि शहर के बीचों-बीच आगा चौक बिल्डर सबरजीतसिंह मोखा द्वारा बनाई गई बहुमंजिला इमारत भी जिला प्रशासन को मुंह चिढ़ा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि शासकीय रिकॉर्ड में इस जमीन के राज्य परिवहन निगम को आवंटित होने की पुष्टि होने पर तहसीलदार कोतवाली प्रदीप मिश्रा द्वारा नामांतरण निरस्त कर दिया गया है। उसके बाद से एंटी माफिया सेल के सक्रिय होने की बजाय प्रकरण को कोतवाली से अधारताल ट्रांसफर कर लिंगरआॅन किया जा रहा है जबकि नियम अनुसार बिल्डिंग राजसात या तोड़े जाने की कार्रवाई की जाना चाहिए थी। इस मामले को पहले ही प्रशासन दस साल से अधिक समय से दबाए हुए है।

वर्जन
नकली रेमडेसीविर इंजेक्शन के मामले में सिटी अस्पताल संचालक सरबजीत सिंह मोखा को गिरफ्तार कर एनएसए के साथ जेल भेज दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच के लिए गठित की गई एसआईटी मोखा से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
सिद्धार्थ बहुगुणा, एसपी

 

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