विधानसभा चुनाव तक सुनाई दे सकती UP पंचायत चुनाव के नतीजे की गूंज

 नई दिल्ली 
उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावों के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए एक खतरे की घंटी बजा दी है। कोरोना महामारी के मौजूदा संकट से जूझ रही केंद्र सरकार और राज्य सरकार के लिए अगले साल विधानसभा चुनावों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस राजनीतिक गतिविधियों से अवगत लोगों के अनुसार, सरकार ने अब विधायकों और सांसदों से कहा है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी “आत्म-प्रचार” से पहले ऑक्सीजन प्लांट्स, अस्पताल के बेड बढ़ाने और दवाओं की खरीद को बढ़ाने के लिए कोशिश करें।

फीडबैक मिलने के बाद पार्टी के नेता क्षेत्र के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से भी गायब हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर पार्टी के एक नेता ने यह जानकारी दी है। एक केंद्रीय नेता ने कहा, "लोगों में ऐसी धारणा है कि भाजपा पश्चिम बंगाल हिंसा पर ध्यान दे रही है, लेकिन कोई भी इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहा है। लोग महामारी से चिंतित हैं जिसने लगभग सभी को प्रभावित किया है। जबकि सरकार लोगों की मदद करने के लिए कदम उठा रही है, लोकिव मंत्री, सांसद और विधायक लोगों की मदद करते हुए और सहानुभूति जताते हुए नहीं दिखा रहे हैं।” उन्होंने कहा, ''जनप्रतिनिधियों को आगाह किया गया है कि छवि और धारणा को बदलने से पहले, उन्हें किए गए कार्य का प्रमाण देना होगा।''

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक अभूतपूर्व जीत हासिल की थी। पार्टी 320 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी। हालांकि अब राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के खराब प्रबंधन के लिए आलोचना की जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बुधवार तक उत्तर प्रदेश में 13,798 मरीजों की मौत हो चुकी है। आपको बता दें कि सोशल मीडिया ऑक्सीजन के लिए इधर-उधर दौड़ रहे लोगों के वीडियो से भर गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि ऑक्सीजन की कमी से कोरोना रोगियों की मौत एक आपराधिक कृत्य है। कोर्ट ने कहा कि यह किसी नरसंहार से कम नहीं।
 

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