चीन कोविड संकट में मदद का दिखावा दूसरी तरफ लद्दाख में चल रहा चाल
नई दिल्ली
देश भर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर सुनामी में बदल चुकी है। कोरोना वायरस के चलते मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। देश में कोविड-19 के मरीजों के लिए ऑक्सीजन और दवाओं की भारी कमी हो गई है। पूरा देश कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच कराह रहा है। लेकिन इसी बीच पड़ोसी चीन इस मौके का फायदा उठाकर अपनी कुटिल चाल चलने में जुट गया है। एक तरफ जहां देश कोरोना वायरस के मरीजों से जूझ रहा है उसी समय सामने आया है कि चीन खामोशी से पूर्वी लद्दाख में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा हुआ है।
एक तरफ जहां दोनों देशों के बीच एलएसी पर स्थिति को अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति में लाने के लिए बातचीत चल रही है उसी समय पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सर्दियों के मुकाबले स्थायी आवास और डिपो के साथ पूर्वी लद्दाख के अंदर वाले क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है। करीब साल भर से चल रहे गतिरोध के बाद इस साल की फरवरी में पहली राहत भरी खबर आई थी जब दोनों पक्षों ने पैंगोंग त्सो झील के किनारे से डिसएंगेजमेंट पर सहमति जताई थी।
इसके बाद जब दोनों सेनाओं के पीछे हटने की तस्वीरें सामने आईं तो पहली बार लगा कि धीरे-धीरे ही सही अब ऐसा माहौल तैयार हुआ है जिससे बाकी क्षेत्रों में डिएस्केलेशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी लेकिन अब अक्साई चिन के ठीक उत्तर में कांग्जीवर और तिब्बत लद्दाख फ्रंटियर में स्थित रुडोक में चीन के स्थायी आवास ने एक बार फिर खतरे की घंटे बजा दी है।
