सामान बांध फिर घर लौट रहे प्रवासी मजदूर
इंदौर
काम-धंधा नहीं होने और लंबे लॉकडाउन के डर से इन्होंने एक बार फिर अपने घर का रुख कर लिया है। हजारों की संख्या में 200 सीसी की क्षमता वाले छोटे से ऑटो पर लोग अपने घरों 1600 से 2000 किलोमीटर के सफर पर निकल चुके हैं। हर ऑटो में कम से कम चार सवारी है। तीन दिन पहले इस तीन पहिया वाहन पर शुरू हुई इनकी जिंदगी अभी अगले तीन दिन तक ऑटो रिक्शा पर ही गुजारनी है। इनका इंदौर के आसपास पहुंचना शुरू हो गया है। अब वे आगे की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले साल की तरह इस साल भी लॉकडाउन में भूखे मरने की नौबत न आ जाए, इसलिए रिक्शा चालक परिवार लेकर यूपी, झारखंड, बिहार के गांवों के लिए निकल पड़े हैं।
बायपास पर एक पूर्व जैसे हालात बनने लगे हैं, रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई गए प्रवासी मजदूर वापस लौटने लगे हैं। पिछले वर्ष भी इन दिनों ऐसे ही दृष्य देखने को मिले थे जहां भूखे-प्यासे मजदूर बदहवास दौड़ते दिखाइ दे रहे थे। अब इस वर्ष भी लोग दो जून की रोटी और बोरियां-बिस्तर बांध कर घर जा रहे है। सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) का रिक्शा चालक मोहम्मद असलम के मुताबिक लाकडाउन खुलने पर कुछ दिनों पूर्व ही मुंबई लौटा था। पत्नी और बच्चों को लेकर नहीं ले गया क्योंकि अभी भी कोरोना खत्म नहीं हुआ था।
रिक्शा चलाकर दिन गुजारने वाले असलम ने एक महीने पहले ही पत्नी से कहा था गाड़ी पटरी पर लौटने लगी है, मुंबई आने की तैयारी कर लो। अचानक मुंबई में कोरोना ने पैर पसारे और चारों तरफ हाहाकर मच गया। रोज कमाने खाने वालों को भूखों मरने की नौबत आ गई। 4 हजार रुपये रोज कमाने वाला असलम पचास रुपये भी मुश्किल से घर ले जा रहा था।
