इस वर्ष की एकमात्र सोमवती अमावस्या 12 अप्रैल को

भोपाल
 ऐसा माना जाता है कि सोमवार के दिन जब अमावस्या पड़े तो वह दिन अति शुभदायी होता है। इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है और इस दिन नदियों में स्नान करके शिव पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होने की मान्यता है। इस साल 2021 में एकमात्र सोमवती अमावस्या का संयोग 12 अप्रैल को पड़ रहा है। वर्तमान में 12 साल में एक बार पड़ने वाला कुंभ मेला हरिद्वार में चल रहा है।

कुंभ के दौरान सोमवती अमावस्या का संयोग पड़ना दुर्लभ माना जा रहा है। इस दिन शाही स्नान भी किया जाएगा। चूंकि कोरोना महामारी का प्रकोप चल रहा है इसलिए ज्यादा श्रद्धालु हरिद्वार नहीं जा रहे हैं। कुंभ के दौरान लग रहे सोमवती अमावस्या का स्नान श्रद्धालु अपने घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर करेंगे।

गायत्री परिवार दो माह से घर-घर बांट रहा गंगाजल

कोरोना के चलते जो श्रद्धालु हरिद्वार में कुंभ मेला में नहीं जा सकते, उनके घर पर ही गंगाजल पहुंचाने का अभियान पिछले दो माह से अखिल गायत्री परिवार के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में गंगाजल पहुंचाया जा चुका है। गायत्री परिवार ने निवेदन किया है कि जो लोग हरिद्वार नहीं जा सकते, वे अपने घर पर ही गंगा स्नान का लाभ लें।

अगले दिन से नवरात्र पर देवी आराधना

सोमवती अमावस्या के अगले दिन से नवरात्र शुरू होगी। सोमवती अमावस्या पर शिव पूजन करने के बाद फिर नौ दिनों तक शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना की जाएगी।

आस्था की डुबकी पर कोरोना का साया

सोमवती अमावस्या पर छत्तीसगढ़ के राजिम में त्रिवेणी संगम और राजधानी के महादेव घाट पर पुण्य की डुबकी लगाने श्रद्धालु आते हैं। हटकेश्वर महादेव का दर्शन करते हैं। इस बार कोरोना का प्रकोप होने से आस्था की डुबकी नहीं लगा सकेंगे।

पांडवों ने वर्षों तक किया था सोमवती अमावस्या का इंतजार

 द्वापर युग में पांडवों ने सोमवती अमावस्या का इंतजार वर्षों तक किया था। सोमवार और अमावस्या का दुर्लभ संयोग बनता है, कलयुग में भी साल में एकाध बार ही यह संयोग आता है। इस दिन सुबह- सुबह उठकर पवित्र नदी में स्नान कर दान पुण्य करना चाहिए। इस दिन दान पुण्य करने से घर में सुख- समृद्धि आती है।

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