नई आबकारी नीति में लाइसेंस नवीनीकरण के नए नियम

ग्वालियर
प्रदेश की नई आबकारी नीति 2021-22 का जिस तरह से मसौदा तैयार हो रहा,उसके अनुसार ही शराब ठेकों के निष्पादन की प्रक्रिया अपनाई गई तो प्रदेश में लिकर सिंडीकेट पर मॉनोपॉली टूटना मुश्किल है। नई नीति में सरकार द्वारा ठेकों की लायसेंस फीस में वृद्धि के साथ नवीनीकरण कराने का विकल्प दिया जा सकता है। ऐसा हुआ तो प्रदेश में सारे बड़े जिलों में पहले से काबिज लिकर सिंडीकेट रिन्युवल कराकर फिर से सारी शराब दुकानों पर अपना कब्जा बरकरार रख सकता है। ऐसी स्थिति में शराब कारोबार में चली आ रही लिकर सिंडीकेट की मनमर्जी पर शिकंजा कसना मुश्किल होगा।

बता दें कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय में बड़े शराब ठेकेदारों ने अपने हिसाब से नीति तैयार कराकर प्रदेश के सारे बड़े जिलों के शराब कारोबार को अपने हाथ में ले लिया है। ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इन जिलों में मनमाने दामों (एमआरपी से अधिक )में शराब की बिक्री करने की शिकायतें लगातार मिल रही हंै। इन जिलों में प्रशासन व आबकारी अमले द्वारा टेस्ट परचेजिंग कराने पर रेट से अधिक में शराब बिकते पाई गई। जिस पर प्रदेश में कई शराब दुकानों का एक-एक दिन का लायसेंस सस्पेंड किया गया। बावजूद इसके लिकर सिंडीकेट की मनमानी जारी है। नई नीति में उम्मीद की जा रही थी कि ऐसे प्रावधान लाए जाएंगे, जिससे लिकर सिंडीकेट को ब्रेक करने छोटे ग्रुपों में शराब दुकानों का निष्पादन होगा। मगर नवीनीकरण कराने से विकल्प से लिकर सिंडीकेट को फिर से बड़े जिलों के शराब कारोबार पर हावी बने रहने का मौका मिलेगा।

बता दें कि पिछले साल कोरोना लॉकडाउन की वजह से शराब दुकानों के नीलामी में देरी हुई थी। वैसे 1 अप्रैल से नया वित्तीय वर्ष शुरू होता है। पिछले साल नीलामी प्रक्रिया लंबी खिंची थी,इसलिए जून तक नए ठेके होते रहे थे। देरी से ठेके होने पर ठेकेदारों की मांग पर सरकार ने दो माह(अप्रैल-मई) का उन्हें अतिरिक्त इस नए वित्तीय वर्ष 20121-22 में दिया है। यही बजह है कि प्रदेश में मौजूदा वित्तीय वर्ष के नए ठेके अब 1 जून से शुरू कराए जाएंगे। 1 जून से पहले आबकारी विभाग को नई नीति फायनल कराकर शराब दुकानों की निष्पादन प्रक्रिया पूरी करना है।

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