6 अप्रैल के बाद… राहुल क्‍या बैठे रहेंगे घर में या कूद पड़ेंगे बंगाल के रण में

कोलकाता/नई दिल्ली
कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता राहुल गांधी अभी तक बंगाल के चुनावी समर में नहीं कूदे हैं लेकिन अब उनके लिए ऐसा करना मुश्किल होगा। राहुल के अब तक पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए न जाने के पीछे राजनीतिक और व्‍यावहारिक कारण बताए जाते रहे हैं। 6 अप्रैल को पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी के राज्‍यों में विधानसभा चुनाव खत्‍म हो जाएंगे। लेकिन इसके बाद भी बंगाल में 5 चरणों का मतदान बाकी रह जाएगा। एक वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेता का कहना था, 'यह तो मुमकिन नहीं है कि पूरी बीजेपी पश्चिम बंगाल में डेरा डाले रहे लेकिन पांचों चरण के मतदान के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल घर बैठे रहें। इसलिए तय मानें कि राहुल आखिरकार बंगाल दौरे पर जाएंगे ही।'

'सवालों से बचने के लिए राहुल नहीं गए'
असल में ऐसे कई राजनीतिक विरोधाभास हैं जिन पर उठने वाले सवालों से बचने के लिए राहुल बंगाल दौरे से बचते रहे। एक और जहां सीपीएम पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सहयोगी है वहीं केरल में वह प्रमुख प्रतिद्वंदी। इसके अलावा और भी मुद्दे हो सकते हैं।

राष्‍ट्रीय और स्‍थानीय राजनीति में संतुलन की कोशिश
कांग्रेस आलाकमान अपनी बंगाल यूनिट की इस मांग के आगे झुक गई कि सत्‍तारूढ़ टीएमसी के खिलाफ वह सीपीएम के साथ हाथ मिला ले। लेकिन उस पर विरोधी दलों का भी दबाव है कि बीजेपी के खिलाफ चुनावी समर में कांग्रेस को ममता बनर्जी का साथ देना चाहिए। इस लिहाज से राहुल का बंगाल से दूर रहना राष्‍ट्रीय राजनीति और स्‍थानीय भावनाओं में संतुलन बनाने के तौर पर देखा जा सकता है। जो भी हो, अगर राहुल 6 अप्रैल के बाद पश्चिम बंगाल जाने का फैसला करते हैं यह देखना दिलचस्‍प होगा कि उनका चुनाव प्रचार किस तर्ज पर होगा। क्‍या वह टीएमसी के खिलाफ हमले करेंगे या फिर उनका निशाना नरेंद्र मोदी और बीजेपी होंगे।

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