पूरे सम्मान और गरिमा के साथ फहराए राष्ट्रीय ध्वज-मंत्री सुश्री ठाकुर
भोपाल
संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री सुश्री उषा ठाकुर ने कहा है कि "हर घर तिरंगा" अभियान के जरिए प्रदेशवासी राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सार्वभौमिक स्नेह और सम्मान प्रदर्शित करेगा। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज भारत के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। यह देशवासियों की भावनाओं और मानस में एक अद्वितीय और विशेष स्थान रखता है। भारत की ध्वज संहिता का पालन करते हुए हम सभी को राष्ट्रीय ध्वज को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ फहराना चाहिए।
भारत की ध्वज संहिता की प्रमुख विशेषताएँ
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का फहराना, उपयोग और प्रदर्शन राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 और भारत की ध्वज संहिता 2002 द्वारा शासित है। राष्ट्रीय ध्वज हाथ से बुना या मशीन से निर्मित भी हो सकता है। इसमें कपास, ऊन, रेशमी खादी और पॉलिएस्टर का उपयोग किया जा सकता है। आम लोग, निजी संगठन और संस्थान अब 24 घंटे अर्थात दिन और रात तिरंगा फहरा सकते हैं।
राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान के अनुरूप सभी दिनों और अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जा सकता है। राष्ट्रीय ध्वज आयताकार होगा, झंडा किसी भी आकार का हो सकता है लेकिन झंडे की लंबाई और ऊंचाई (चौड़ाई) का अनुपात 3:2 होगा। क्षतिग्रस्त या अस्त-व्यस्त झंडा प्रदर्शित नहीं किया जा सकता। किसी अन्य ध्वज या झंडों के साथ एक ही मास्टहेड से राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाना चाहिए। जब भी राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित किया जाता है तो उसे सम्मान की स्थिति में होना चाहिए और स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए।
मंत्री सुश्री ठाकुर ने आजादी के अमृत महोत्सव पर सभी प्रदेशवासियों से अपने घर, कार्यालय, संस्था, सार्वजनिक स्थान आदि पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर न सिर्फ देश की स्वतंत्रता की गरिमा को बढ़ाएँ बल्कि स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए उन सभी महान वीर क्रांतिकारियों और महापुरुषों के बलिदानों के प्रति सच्ची निष्ठा भी व्यक्त करें।
