Big Scam: तहसीलदारों और पटवारियों की मिलीभगत से आदिवासियों की जमीन बेच खायी, 3 तहसीलदार और 4 पटवारी पर FIR

भोपाल
कटनी जिले में आदिवासियों को मिली सरकारी जमीन में करोड़ों का घोटाला सामने आया है. ईओडब्ल्यू ने इस मामले में तत्कालीन 3 तहसीलदार और चार तत्कालीन पटवारी पर एफ आई आर दर्ज की है. इसके अलावा एक प्राइवेट कंपनी के खिलाफ भी एफ आई आर दर्ज की गई है. आरोपी सरकारी अधिकारियों ने कलेक्टर की अनुमति के बिना आदिवासियों की करोड़ों की जमीन एक प्राइवेट कंपनी के प्रतिनिधि को ट्रांसफर कर दी. आरोपियों ने मिलीभगत कर करोड़ों का भ्रष्टाचार किया. ईओडब्ल्यू भोपाल ने इन सभी आरोपियों पर भ्रष्टाचार अधिनियम समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की है.

ईओडब्ल्यू की सब इंस्पेक्टर फरजाना परवीन ने बताया कि शिकायत में आरोपियों ने मिलीभगत कर आदिवासियों की 54 एकड़ सरकारी जमीन को मामूली राशि में नामांतरण किया गया. इसमें करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है. उन्होंने बताया शिकायत की जांच में पाया गया कि आरोपी रमेश सिंह जो कि टॉप ग्रेन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड सतना का प्रतिनिधि है उसने तत्कालीन पदस्थ तहसीलदारों और पटवारियों की मिलीभगत से ग्राम करौंदी, कुठिया, महगवा और गडोहा की लगभग 54 एकड़ जमीन को 2008 में मामूली राशि में खरीद लिया था.

तहसीलदार-पटवारियों की मिलीभगत
तहसीलदार एसके गर्ग, आरपी अग्रवाल, आरपी द्विवेदी ने दस्तावेजों की जांच किए बिना सरकारी पट्टे की जमीन बिना कलेक्टर की अनुमति के नामांतरण कर दी. पटवारी नत्थू लाल रावत और संतोष दुबे के साथ सुखदेव सिंह ने दस्तावेजों में पहले के वर्षों का अभिलेख रोस्टर ना कर उसे खसरे की भूमि में दर्ज कर दिया. तहसीलदार और पटवारी की मिलीभगत से आदिवासियों की जमीन का नामांतरण किया गया.

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