बारिश में बहे NH 46 की कंसलटेंट कंपनी के कामों की होगी जांच, आंख मूंदे रहे जिम्मेदार अफसर

भोपाल
भोपाल-मंडीदीप रोड एनएच 46 पर बारिश में बहे रोड को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक रोड का अधिकांश निर्माण कोरोना संक्रमण काल में होने के कारण अफसरों की लापरवाही सामने आई है, वहीं निर्माण कंपनी ने इसका लाभ उठाया है। सरकार ने कार्रवाई करते हुए निर्माण कंपनी सीडीएस इण्डिया लिमिटेड और कंसलटेंट थीम इंजीनियरिंग को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। वहीं एमपीआरडीसी के प्रबंधक को निलंबित कर दिया है और दो इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है।

भोपाल-मंडीदीप मार्ग पर समरधा के पास कलियासोत नदी पर बनाए गए एनएच 46 के निर्माण को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दरअसल सड़क का अधिकांश निर्माण कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान हुआ, इस दौरान एमपीआरडीसी के अधिकारी जिनका काम सड़क की ड्राइंग और डिजाइन के अनुरूप निर्माण की जांच करना थी, उन्होंने उतनी मुस्तैदी से इस काम को नहीं किया जितना उन्हें करना था। उन्होंने कोरोना का बहाना बनाकर इस काम से पल्ला झाड़ लिया। एक तरह से देखा जाए तो यह महत्वपूर्ण सड़क उस दौरान निर्माण कंपनी और कंसलटेंट के भरोसे पर छोड़ दी गई और जिस सरकारी एजेंसी की जिम्मेदारी उसके निर्माण की क्वालिटी देखरेख करने की थी वे इससे अनजान रहे।

एमपीआरडीसी के अफसरों के अनुसार इस प्रोजेक्ट के मामले में एक खास बात यह भी थी कि इसकी डिजाइन तैयार करने और सड़क व पुल बनाने का काम एक ही कम्पनी के पास था जिसका फायदा काम पाने वाली कम्पनी ने उठाया और रही सही कसर कंसलटेंट ‘थीम इंजीनियर’ ने पूरी कर दी जिसका नतीजा यह रहा कि रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात एनएच 46 पर समरधा के पास बनाए गए एप्रोच रोड और पुल बह गए। यहां मुख्य मार्ग में भी पचास मीटर तक दरारे आ गई हैं।  

बीमार थे अफसर या कोरोना का बहाना बनाया
लोकनिर्माण विभाग ने एमपीआरडीसी के जिम्मेदार अफसरों पर सस्पेंशन की कार्रवाई तो की है, लेकिन उनके गैरजिम्मेदाराना रवैए पर विस्तृत जांच होने की आवश्यकता है कि क्या कोरोना काल में उन अफसरों के साथ कोई स्वास्थ्यगत समस्या थी जो वे निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचे थे। गौरतलब है कि मामले में प्रबंधक (इंजीनियर) एसपी दुबे को निलंबित कर दिया है। साथ ही तत्कालीन जिला प्रबंधक पवन अरोड़ा और सहायक महाप्रबंधक डीके जैन (सेवानिवृत्त) के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

ये हैं गुनाहगार…

  • निर्माण कंपनी: ईपीसी कॉन्ट्रेक्ट के तहत निर्माण कंपनी सीडीएस इण्डिया लिमिटेड को डिजाइन बनाने की जिम्मेदारी भी थी। डिजाइन में ही खामी पाई गई है।
  • कंसलटेंट: इस सड़क निर्माण के निरीक्षण और सुपरविजन की जिम्मेदारी थीम इंजीनियरिंग कंसलटेंट के पास थी। जो उन्होंने बखूबी नहीं किया।
  • एमपीआरडीसी: पूरे प्रोजेक्ट का ओवरआॅल सुपरविजन और निर्माण क्वालिटी कंट्रोल की जिम्मेदारी एमपीआरडीसी के अफसरों की थी, जिसमें वे प्रथम दृष्टया गैरजिम्मेदार साबित हो रहे हैं।

बनेगी नई डिजाइन
बारिश में धंसी रोड और पुल के फाउंडेशन की नई डिजाइन बनाई जाने के लिए आईआईटी रुड़की से संपर्क किया गया है। एमपीआरडीसी की ओर से आईआईटी रुड़की के साथ पत्राचार शुरू कर दिया है। इसके अलावा भोपाल-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर 3 बायपास, 4 ग्रेड सेपरेटर, 5 अंडरपास, 3 बड़े पुल, 13 छोटे पुल तथा 32 पुलियाएं निर्मित की गई थी। यह कार्य मई 2021 में पूर्ण किया गया था। इस घटना के बाद इस पूरे काम की आईआईटी रुड़की की टीम द्वारा जांच कराई जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि कोई डिजाइन में खामी तो नहीं है और उसमें क्या बदलाव करना है।

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