शहर में 28 लाख आबादी में डेंगू-मलेरिया से रोकथाम के लिए लगे कर्मचारी

भोपाल  

राजधानी में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा बढ़ गया है। राजधानी 22 मरीज मिल चुके हैं। लेकिन इन बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकार के पास पर्याप्त अमला ही नहीं है। हालत यह है कि भोपाल की 28 लाख की आबादी में मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए सिर्फ 105 कर्मचारी हैं। इस वजह से हर वार्ड में न तो लार्वा सर्वे हो पा रहा है, न ही फीवर सर्वे।

सरकार मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए कितनी गंभीर है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भोपाल में 1977 में अमला स्वीकृत हुआ था। उसके बाद से पद ही नहीं बढ़ाए गए। उधर, पुराने कर्मचारी जिस लिहाज से सेवानिवृत हुए, उस अनुपात में भर्ती नहीं की गई। इस कारण अब स्वीकृत अमले में भी आधे कर्मचारी ही बचे हैं। गौरतलब है कि वर्ष 1977 में भोपाल की आबादी चार लाख थी। उस समय नगर निगम में सिर्फ 25 वार्ड थे। अब 85 वार्ड हैं। उस समय मच्छरों से ज्यादातर मलेरिया और हाथीपांव की बीमारी हो रही थी।

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