प्रदेश में देसी गाय की प्रजातियां बढ़ाने गो संवर्धन केंद्र जल्द शुरू

 जबलपुर
नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय ने गाय की विदेशी और मिश्रित नस्लों को बढ़ावा देने का काम किया, अब वह देसी गाय की प्रजातियों को बढ़ाने पर जोर देगा। इसके लिए विश्वविद्यालय, जबलपुर, महू और रीवा वेटरनरी कालेज में गो संर्वधन केंद्र शुरू करने जा रहा है। इन केंद्रों की मदद से वेटरनरी विश्वविद्यालय के विज्ञानी, वेटरनरी विभाग के डाक्टर की मदद से स्थानीय प्रजातियों की पैदावार बढ़ाने पर काम करेंगे। महू में गो संवर्धन केंद्र शुरू किया जा रहा है। इसे पूरी तरह से संचालित करने के बाद जबलपुर और रीवा वेटरनरी कालेज में दो अन्य केंद्रों को शुरू किया जाएगा। विवि के डायरेक्टर एक्सटेंशन और रिसर्च विभाग इस पर काम करेंगे।

इसलिए खास हैं ये नस्ल

निमाड़ी गाय – इसे निमाड़ की रानी भी कहा जाता है। इसके शरीद में सफेद और लाल रंग के धब्बे होते हैं। यह प्रतिदिन 4 से 5 लीटर दूध देती है, लेकिन मिश्रित प्रजातियों की गाय की नस्ल को बढ़ावा देने की वजह से इनकी संख्या कम हो रही है।

मालवी गाय – यह नस्ल मध्यप्रदेश के मंदसौर, राजगढ़, शाजापुर में पाई जाती है। इसके पैर मजबूत और शक्तिशाली स्लेटी रंग के होते हैं। यह दिन में 4 से 5 लीटर दूध देती है।

गावलाबा – यह जबलपुर से सिवनी और छिंदवाड़ा में पाई जाती है। यह देसी गाय में सर्वोत्तम गाय है, जो दिन में 4 से 5 लीटर दूध देती है। इस नस्ल को बचाने के अब तक बेहतर प्रयास नहीं हुए।

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