टीटू अंबानी की मौसमी की तरह रियल लाइफ में ईमानदार हूं: दीपिका सिंह

टीवी शो दीया और बाती हम फेम दीपिका सिंह फिल्म ‘टीटू अंबानी’ से बड़े पर्दे पर एंट्री करने जा रही हैं। यह उनकी फीमेल लीड रोल वाली फिल्म है, जो 8 जुलाई को सिनेमाघर में रिलीज होगी। फिल्म का लेखन-निर्देशन रोहित राज गोयल ने किया है। डायलॉग अभिषेक मनोहर चंदा व प्रोड्यूस महेंद्र विजयदान देथा और दिनेश कुमार ने किया है।  मौसमी आज की लड़की है। वह अपने हस्बैंड टीटू से बहुत प्यार करती है और उतना ही अपने पैरेंट्स को चाहती है। उसके अपने कुछ प्रिंसिपल्स हैं। वह मम्मी-पापा की श्रवण कुमार बनना चाहती है। शादी के बाद भी उनकी हेल्प करना चाहती है। लेकिन क्या मम्मी-पापा हेल्प ले पाते हैं, क्योंकि हम ऐसी सोसायटी से बिलांग करते हैं, जहां लड़की के यहां का पानी पीना पाप माना जाता है। मगर मौसमी शादी के बाद भी ऐसी चीजों को नहीं मानती है। फिल्म में एक डायलॉग है- एक लड़के से कभी पूछा नहीं जाता कि वह शादी के बाद अपने मां-बाप का खयाल रखेगा या नहीं, पर एक लड़की से ही क्यों एक्सपेक्ट किया जाता है। आखिर एक माता-पिता इकलौती लड़की को पाल-पोसकर बड़ा किया है, उसके एज्युकेशन पर इनवेस्ट किया है, ऐसे में वह अपने मां-बाप को नहीं देखेगी, तब कौन देखेगा? कुछ ऐसा मौसमी का किरदार है, जो हंसाते-गुदगुदाते और सांग के जरिए अपनी बात कहती है, जिससे दर्शकों को अपनी कहानी लगेगी। मुझे लगता है, ऐसे सेंसिटिव सब्जेक्ट पर बातें होनी चाहिए, जो समय की मांग है। निजी लाइफ में मौसमी से कितना मेल खाती हैं? यह पूछे जाने पर दीपिका सिंह ने कहा कि देखिए, पूरी तरह तो बिल्कुल मेल नहीं खाती, क्योंकि वह एक कैरेक्टर है, जो लिखा गया है। हां, मौसमी की तरह मैं भी ओनेस्ट हूं। मेरी भावना है कि पैरेंट्स की मदद करती रहूं। जब-जब मौका मिलता है, उनके साथ खड़ी होती हूं। आज मम्मी-पापा की मदद करने जाऊं, तब वह तकलीफें मुझे भी आती हैं। उन्हें जरूरत होगी, तब भी वे कहते हैं- नहीं-नहीं, हमें जरूरत नहीं हैं। तू अपने घर में खुश रह, तू अपना देख, अपना घर देख। शायद यह इतनी पुरानी चीज है कि अपनी बच्ची से हेल्प लेना, जल्दी इतना इजी नहीं है। फिल्म की शूटिंग अप्रैल-मई महीने उदयपुर में हुई है। वहां पर कई बार आंधियां आ जाती थीं। वहां की महिलाएं मुझे जानती हैं, तब शूटिंग देखने के लिए दूर-दराज गांव से महिलाएं आती थीं। फिलहाल पेंडेमिक के वक्त उनके साथ फोटो नहीं ले पाती थी। हम सब मिलकर खाना खाते थे। इतना नेचुरल-वे हंसते-हंसाते शूटिंग हो जाती थी कि हमें पता ही नहीं चलता था। हां, स्टार्टिंग के चार-पांच दिन स्ट्रेसफुल था। कारण कि अपने दिमाग में कैरेक्टर की लेयर तैयार करनी थी। लेकिन रघुवीर यादव, वीरेंद्र सक्सेना, तुषार पांडे समता जी आदि इतने मझे कलाकार हैं कि इन सबके सपोर्ट से चीजें काफी स्मूथ हो गई।

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