कॉलेजों की बैलेंस शीट मापदंडों पर खरी नहीं उतरी, अब 62 हजार में लें डिग्री

भोपाल
प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने एम. फर्मा की फीस में सीधे 80 हजार रुपये की कटौती की है। कमेटी 16 साल के इतिहास में पहली बार इतनी बढी राशि में फीस की कटौती की गई है। कालेज फीस निर्धारित करने के लिये सालाना खर्चे बैलेंस शीट में नहीं दिखा सके। इसके चलते कमेटी ने उनके प्रस्ताव में दी गई फीस पर कैंची चला दी।

एमफार्मा की डिग्री करने विद्यार्थियों को एक लाख 42 हजार रुपए का भुगतान नहीं करना होगा। वे अब महज 62 हजार रुपये की सालाना फीस में एमफार्मा की डिग्री कर पाएंगे। प्रदेश में एमफार्मा के करीब 51 कॉलेज संचालित हो रहे हैं। हरेक कॉलेज की न्यूनतम एक लाख 42 हजार फीस निर्धारित होती आई है। वर्तमान में फीस कमेटी में कॉलेजों के प्रस्ताव भेजे गये। जहां कॉलेजों ने अपनी फीस डेढ़ लाख रुपये करने की मांग की।

जब कमेटी के सदस्यों के सदस्यों कॉलेजों की अपनी बैलेंस शीट में डेढ़ लाख रुपये की फीस निर्धारण के लिये खर्चों का हिसाब मांगा, तो पूरे खर्चे तक नहीं बता सके। उन्होंने जो खर्चे बताये उनका फीस से कोई संबंध नहीं था। इसलिये फीस कमेटी के सभी सदस्य और अध्यक्ष रविंद्र रामचंद्र कान्हेरे ने एमफार्मा की फीस की हरेक मदों का हिसाब देखा तो 62 हजार रुपये सालाना फीस भी ज्यादा दिखाई दे रही थी। क्योंकि कॉलेजों की बैलेंस शीट उक्त फीस को निर्धारित करने के मापदंड नहीं बता रहे थे। एमफार्मा जैसे प्रोफेशनल डिग्री का मान रखने के लिये फीस 62 हजार रुपये सालाना निर्धारित की गई है।

कोरोनाकाल ने बिगाड़ा गणित
कोरोना काल के दो साल कॉलेजों के लिए काफी नुकसानदायक रहे हैं। कहीं कॉलेजों ने प्रोफेसरों को बाहर किया, तो वेतन में आयी कटौती के कारण प्रोफेसरों ने कॉलेजों को छोड़ दिया। इससे उनकी सैलरी बैलेंस शीट में स्थान नहीं बना सकी और खर्चे कम होते चले गये। इससे एफार्मा की फीस में चालीस फीसदी तक कटौती हुई है।

इनका कहना है…
कॉलेजों की बैलेंस शीट के हिसाब से ही फीस का निर्धारण किया जाता है। कमेटी सदस्यों ने कालेजों द्वारा दी गई बैलेंस शीट बरीकी से परीक्षण किया है। इसके बाद एमफार्मा की न्यूनतम फीस तय की गई है।
रविंद्र रामचंद्र कान्हेरे, अध्यक्ष, फीस कमेटी

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