निगम ने सीआर पार्क में मछली विक्रेताओं को जारी किया कारण बताओ नोटिस, मांगा अंडरटेकिंग

नई दिल्ली
निगम के पशु चिकित्सा विभाग ने बृहस्पतिवार को दक्षिणी दिल्ली के चितरंजन पार्क में खुले प्लेटफार्म पर बिना लाइसेंस के मांस और मछली की दुकानें चलाने का हवाला देते हुए मांस और मछली बाजार को बंद करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही विक्रेताओं से दुकानों को बंद कर देने से संबंधित अंडरटेकिंग की मांग भी की है। इस मामले में ईस्ट बंगाल डिस्प्लेस्ड पर्सस (ईबीडीपी) संस्थान ने एलजी वीके सक्सेना को दिल्ली के मिनी बंगाल कहे जाने वाले चितरंजन पार्क स्थित एक नंबर व दो नंबर मार्केट में मछली की दुकानों को नियमानुसार संचालित कराने के लिए पत्र लिखा है। इस पत्र में मार्केट के मछली विक्रेताओं को प्रताड़ित करने व दुकानों को बंद करने के आदेश का जिक्र किया गया है। मालूम हो कि नौ जून को मार्केट के कई दुकानदारों को दिए गए नोटिस के अनुसार, मार्केट में खुले में मांस बेचना सिविक एजेंसी की लाइसेंसिंग पालिसी के खिलाफ है। मामले में संबंधित पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अधिकारी सवालों से बचते नजर आए।इससे पहले अप्रैल में भी मछली विक्रेताओं को तत्कालीन दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने लाइसेंस लेने के लिए नोटिस भेजा था।

दरअसल, इन बाजारों में डीडीए ने विक्रेताओं को जो चबूतरे आवंटित किए थे उनके दस्तावेज पर कहीं भी यह नहीं दर्ज है कि ये चबूतरे मछली बेचने के लिए दिए जा रहे हैं। इसमें एक पेंच यह भी आ रहा है कि इनके चबूतरे चार बाई चार फुट के हैं, जबकि लाइसेंस के लिए कम से कम 15 बाई 15 फुट के होने चाहिए। हालांकि निगम के अधिकारियों ने विक्रेताओं को इस बात का समाधान भी बता दिया है। उनका कहना है कि चार-चार विक्रेता मिलकर लाइसेंस ले लें और आपस में तालमेल कर दुकान चलाएं। निगम अधिकारियों का कहना है कि विभाग की ओर से मीट की दुकानों के लिए जारी किए गए लाइसेंस के अनुसार, कोई भी मीट की दुकान खुले में नहीं खोली जा सकती हैं। इस बात को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए यहां मछली की दुकानें लगाई जा रही हैं। दुकान वाले जांच के दौरान अपना अलाटमेंट लेटर नहीं दिखा सके, जिसमें मौके को मछली बाजार बताया गया है। ये विक्रेता कई साल से दुकानें लगा रहे हैं। ये चबूतरे साल 2003 में डीडीए की ओर से आवंटित किए गए थे, लेकिन अलाटमेंट लेटर में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि इन्हें मछली बेचने के लिए अलाट किया है।

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