शोभारानी कुशवाह को भाजपा ने भेजा कारण बताओ नोटिस, पूछा- आपको पार्टी से निष्कासित क्यों न किया जाए

नई दिल्ली
भाजपा की केंद्रीय अनुशासन समिति ने राजस्थान की विधायक शोभारानी कुशवाह को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है. शोभारानी ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद तिवारी के पक्ष में क्रास वोटिंग की थी, जिस पर उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया। क्रास वोटिंग की वजह से राजस्थान से भाजपा समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान में कांग्रेस ने तीन, जबकि भाजपा ने एक सीट पर जीत हासिल की। कांग्रेस की तरफ से रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी, जबकि भाजपा की तरफ से घनश्याम तिवारी ने चुनाव में जीत हासिल की।

क्या है नोटिस में?
भाजपा ने शोभारानी कुशवाह को भेजे नोटिस में कहा, 'आपने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करके घोर अनुशासनहीनता का परिचय दिया है। यह भारतीय जनता पार्टी के संविधान व नियमों के आर्टिकल 25 के रूल 10 ब का भी उल्लंघन है। कृपया इस पत्र के जारी होने की तिथि से सात दिन के अंदर अधोहस्ताक्षरित को कारण बताएं- क्यों नहीं आपको पार्टी की प्रारंभिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया जाए? सुनिश्चित करें आपका उत्तर इस कार्यालय में 19 जून 2022 तक अनिवार्य रूप से प्राप्त हो जाए। जांच के अंतिम परिणाम आने तक आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तथा समस्त अन्य जिम्मेदारियों एवं दायित्वों से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।'

काम कर गई अशोह गहलोक की रणनीति
कांग्रेस और उसके समर्थक निर्दलीय एवं अन्य पार्टियों के विधायकों में सेंधमारी की आशंका के चलते राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायकों को पहले 9 दिन तक उदयपुर के एक रिसोर्ट में और फिर एक दिन जयपुर के एक होटल में रखा। गहलोत की रणनीति का ही परिणाम रहा कि तीन सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों को जीत मिली। सभी को कुल 126 वोट मिले।

कांग्रेस से पहले से ही संपर्क में थीं शोभारानी
दूसरी तरफ, भाजपा ने जयपुर के एक रिसोर्ट में चार दिन तक अभ्यास वर्ग के नाम पर अपने विधायकों की बाड़ेबंदी की थी। फिर भी भाजपा की विधायक शोभारानी कुशवाह ने क्रास वोटिंग की। इससे पार्टी की आंतरिक राजनीति में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा नेताओं का अनौपचारिक तौर पर कहना है कि शोभारानी से कांग्रेस के नेता पहले से ही सम्पर्क में थे। इस बात की जानकारी प्रदेश भाजपा के कुछ नेताओं को थी, लेकिन उन्होंने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

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