ग्रामीण विकास विभाग : वाटर स्थिरीकरण टैंक सुधार रहे नदियों की सेहत

भोपाल
प्रदेश में नर्मदा समेत अन्य प्रमुख नदियों में मिलने वाले मल जल को रोकने के लिए सरकार इस समय वाटर स्थिरीकरण टैंक का सहारा ले रही है। इन टैंकों के उपयोग की तकनीक का असर भी पंचायत और ग्रामीण विकास को सकारात्मक रूप में मिला है जिसे उन नदियों के लिए भी प्रभावी किया जाएगा जहां अभी यह व्यवस्था शुरू नहीं हुई है।

ग्रामीण विकास विभाग के इंजीनियरों द्वारा जल विशेषज्ञों की मदद से मुख्य नदियों में मिलने वाले जल मल को शुद्धिकरण के बाद ही नदियों में मिलने के लिए तैयार प्लान पर कुछ जिलों में काम शुरू किया है। नर्मदा नदी के किनारे बसे शहरों में इस तकनीक का उपयोग कर वहां से निकलने वाले जल मल के शुद्धिकरण का काम किया जा रहा है। बताया गया कि इस तकनीक के अंतर्गत नदी के तट से पहले आबादी वाले क्षेत्रों से निकलने वाले जल मल को रोकने के लिए दो से तीन टैंकों का निर्माण किया जाता है। जल मल स्थिरीकरण के इन टैंकों के बनाने का फायदा यह है कि नाली या नाले के रूप में आने वाले जल मल को पहले बड़े टैंक में भरा जाता है।

उस टैंक में पालिथीन या अन्य बड़े अपशिष्ट वाले कचरे रुक जाते हैं और स्थिर हुए जल को दूसरे टैंक में छोड़ा जाता है। दूसरे टैंक में मल रुक जाता है और इसके बाद साफ हुआ पानी फिर तीसरे टैंक में छोड़ा जाता है। इस टैंक में रोके जाने के बाद पानी काफी हद तक साफ हो जाता है और तब इसे नर्मदा या अन्य नदियों में प्रवाहित किया जाता है।

खरगोन में पहुंची टीम
इसी परिप्रेक्ष्य में पिछले दिनों खरगोन जिले में इस व्यवस्था का निरीक्षण करने टीम पहुंची। यहां नर्मदा नदी में मिलने वाले जल को शुद्ध कर छोड़ने की प्रक्रिया 8 माह से प्रचलन में हैं। इस तकनीक का निरीक्षण वॉटर एड के तकनीकी विशेषज्ञ लेनिन ने किया। लेनिन ने गांवों में गंदे पानी को नदी या नाले में जाने से पहले उसे शुद्ध करने की अन्य तकनीक जानकारी भी दी। जिला पंचायत के अफसर भी सभी गांवों को ओपन डेफिकेशन फ्री करने के लिए लगातार ऐसे कार्यों पर समीक्षा कर रहे हैं। कई गांवों में गंदे पानी को शुद्ध कर नर्मदा नदी व अन्य नदियों में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यही नर्मदा स्वच्छता अभियान भी है।

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