हरियाली बढ़ाएं, पर्यावरण बचाएं

( अमिताभ पाण्डेय )
देश _ दुनिया के मौसम में हो रहा बदलाव , प्राकृतिक आपदाओं में बढ़ोतरी, नई नई बीमारियों का प्रकोप यह बता रहा है कि पर्यावरण बिगड़ रहा है। इसके कारण प्रकृति का चक्र असंतुलित हो गया है। मनुष्य अपने लाभ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन कर रहा है। इसके कारण गर्मी बढ़ती जा रही है।

बढ़ता हुआ यह तापमान दुनियाभर में बढ़ती गर्मी , जलवायु परिवर्तन के रूप में हमारे सामने है। ग्लोबल वार्मिंग , क्लाइमेट चेंज इन दिनों सारी दुनिया में चिंता और  चर्चा का विषय बना हुआ है।इसका दुष्प्रभाव सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर हो रहा है। दुनियाभर में जैव विविधता नष्ट हो रही है। अब तक अनेक जीव जंतुओं की प्रजातियां नष्ट हो चुकी हैं। हमारे जीवन में रासायनिक पदार्थों का बढ़ता उपयोग जल, जंगल , जमीन को बहुत नुकसान पहुंचा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हमें विचार करना होगा कि विकास के नाम पर प्रकृति को नष्ट करने वाली ताकतों को कैसे रोका जाए। जो विकास हमारे प्राकृतिक संसाधनों को खत्म करके मनुष्य को बीमार बना रहा है , ऐसे विकास की अवधारणा को अब रोकना ही होगा।

जो विकसित , पूंजीपति और प्रभावशाली देश हैं वे विकासशील देशों के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने में लगे हैं। इसे सख्ती से रोक दिया जाना चाहिए। पर्यावरण को नुक़सान पहुंचा रहे देश हों अथवा कोई प्रभावशाली व्यक्ति उनको रोकने की कार्यवाही करना जरूरी है।

इस बारे में पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर काम कर रहे मध्यप्रदेश के  समाजसेवी लक्ष्मीनारायण त्रिकार बताते हैं कि भीषण गर्मी , सिकुड़ते जल स्त्रोत , बढ़ता प्रदूषण ,  नष्ट होता पर्यावरण , प्रकृति का अत्यधिक दोहन इस दुनिया को विनाश की ओर ले जा रहा है। हमारे आसपास पेड़, जल और जंगल नष्ट हो रहे हैं जिससे भूमि , जल और वायु का प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

जल, जंगल और जमीन प्रकृति का उपहार हैं।  इनका  मनुष्य लगातार  दोहन करता चला जा रहा है। अफसोस यह है कि मनुष्य की आवश्यकता कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है। I प्रकृति का दोहन भी बढ़ता जा रहा है।मनुष्य का लालच नहीं रुका तो पर्यावरण का नुकसान मानवता के लिए बड़े संकट लेकर आएगा।

  पर्यावरणविद श्री त्रिकार के अनुसार  आज आवश्यकता इस बात की  है कि दुनियाभर के   मनुष्य  प्रकृति के लिए अपनी नैतिक जिम्मेदारी  को समझें। पर्यावरण संरक्षण का  संकल्प लें। हमें आने वाली पीढ़ी को बेहतर पर्यावरण देना है। हम सब हरियाली बढ़ाएं और पर्यावरण बचाए।

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