उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्वास्थ्य संस्थाओं में नागरिकों का भरोसा बढा़एँ

भोपाल

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा है कि शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में संसाधनों को बढ़ाया गया है। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर स्वास्थ्य संस्थाओं के प्रति आम नागरिकों में भरोसा बढ़ाये। आम नागरिकों का शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में यह भरोसा होना चाहिये कि उन्हें निजी अस्पतालों से अच्छा इलाज मिलता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने प्रदेश के जिला अस्पतालों से जुड़ कर विभागीय वर्चुअल समीक्षा की। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान, स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, स्वास्थ्य संचालक श्री अनुराग चौधरी और श्री दिनेश श्रीवास्तव भी मौजूद थे।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि सभी जिला और सिविल अस्पतालों में संसाधनों का विस्तार किया गया है। अस्पतालों में पैथालॉजी जाँच के लिये नई मशीनें लगाई गई हैं। सोनोग्राफी, डिजिटल एक्स-रे मशीन और सीटी स्केन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। अस्पतालों में स्टॉफ की भी नियुक्ति की गई है। मरीजों को नि:शुल्क दवाइयाँ और अन्य सुविधाएँ दी जा रही हैं। इन सबके होते हुए यदि किसी बात की कमी है, तो वह हमारी इच्छा-शक्ति की है। कोरोना काल में शासकीय अस्पतालों में चिकित्सकों और पैरा-मेडिकल स्टॉफ द्वारा बेहतर सेवाएँ देने से आम नागरिकों का उन पर भरोसा बढ़ा है। इसे और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

स्वास्थ्य संस्थाओं का बदलेगा स्वरूप

प्रदेश के सभी जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और उप स्वास्थ्य केन्द्र को बेहतर बनाने के लिये संस्था प्रमुख को बजट और अधिकार दिये जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने विभागीय समीक्षा बैठक में कहा कि सभी अस्पतालों के प्रमुखों को अस्पताल के सिविल, इलेक्ट्रिकल और इंटीरियर के संधारण और मरम्मत के लिये अधिकार एवं बजट उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रमुख अस्पताल में संधारण और रख-रखाव के जरूरी कामों को आसानी से कर सकें, इसके लिये अनावश्यक प्रक्रियाओं से भी मुक्त रखा जायेगा। इसमें स्वास्थ्य संस्था में रंगाई-पुताई से लेकर बिजली फिटिंग और अन्य छोटे-मोटे मरम्मत के कार्य शामिल होंगे। स्वास्थ्य संस्था प्रमुखों को अब किन्तु-परंतु का कोई बहाना नहीं रहेगा। उनके पास अपनी संस्था को बेहतर ढंग से संधारित करने का काम रहेगा। संस्था प्रमुख का उद्देश्य होना चाहिये कि उनकी संस्था में आने वाला व्यक्ति पूरी तरह से संतुष्ट होकर जाये। उसे उपचार के साथ अन्य सुविधाएँ भी मिले।

निर्धारित दवाइयाँ उपलब्ध नहीं होना गंभीर मामला

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये सीएमएचओ और सिविल सर्जन की सीधी जिम्मेदारी है। इन्हें दवाइयों को बाजार से क्रय करने के अधिकार भी दिये गये हैं। संस्थाओं के पास दवाओं का पैसा उपलब्ध होने के बाद भी दवाइयाँ क्रय नहीं किया जाना गंभीर मामला है। अशोकनगर, श्योपुर, छतरपुर, दतिया और अनूपपुर जिला अस्पताल में दवाइयों की खरीदी में विलंब को गंभीर अनियमितता मानते हुए एसीएस श्री सुलेमान ने इन अस्पतालों के स्टोर-कीपर को तुरंत बदलने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतें प्राप्त नहीं होना चाहिये।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि शासकीय अस्पतालों में जाँच की बेहतर मशीनें हैं। इसके बावजूद मरीजों को अन्यत्र जाँच कराना पड़े, यह स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने जिला अस्पतालों में उपलब्ध कराई गई डायलिसिस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की बात कही। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि वह खुद फील्ड में भ्रमण कर अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे और दिये गये निर्देशों के अनुरूप की गई कार्यवाही का जायजा लेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से एक नई पहल की गई है। जिला स्तर और नगरीय क्षेत्र में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक पहुँचाने की टेलीमेडीसिन अभिनव पहल है। इसमें जिला स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सक की संस्था को 'हब' और ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केन्द्र को 'स्पोक' कहा गया है। ग्रामीण स्वास्थ्य केन्द्र से सीएचओ के माध्यम से जिला स्तर के हब अस्पताल में मौजूद विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम लोगों को यह विश्वास होना चाहिये कि उन्हें अपने निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर जिला और नगरीय क्षेत्र के अस्पताल जैसा उपचार मिल रहा है। समीक्षा बैठक में अन्य विभागीय योजनाओं की भी समीक्षा की गई। एमडी एनएचएम श्रीमती प्रियंका दास ने एनएचएम के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष से जुड़ कर विभागीय योजनाओं की प्रगति पर प्रेजेंटेशन दिया।

 

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