मंकीपाक्स का खतरा अभी कोरोना के स्तर तक नहीं बढ़ा: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

टोक्यो
यूरोप में मंकीपाक्स ( Monkeypox ) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन को इसे रोकने के लिए फिलहाल सख्त उपायों की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है। राष्ट्रपति बाइडन ने कहा है कि उन्हें दुनिया के कई देशों में फैल रही मंकीपाक्स के लिए अभी सख्त उपायों की आवश्यकता महसूस नहीं हुई है। उन्होंने कोरोना महामारी से मंकीपाक्स की तुलना की और कहा, 'मुझे नहीं लगता कि मंकीपाक्स वायरस उस तरह की चिंता के स्तर तक बढ़ सकता है, जिस स्तर तक कोविड-19 महामारी थी।।

अफ्रीका के बाहर मंकीपाक्स की पहचान शायद ही कभी की जाती है। लेकिन शुक्रवार तक दुनिया भर में इसके 80 पुष्ट मामले थे। इनमें अमेरिका में कम से कम दो और अन्य 50 संदिग्ध मामले मिले थे। रविवार को दक्षिण फ्लोरिडा के ब्रोवार्ड काउंटी में मंकीपाक्स के एक संभावित मामले की भी जांच की जा रही थी। इससे पहले रविवार को बाइडन ने कहा था कि यूरोप तथा अमेरिका में हाल में सामने आए मंकीपाक्स के मामलों को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता है। इस बीमारी पर पहली बार सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करते हुए बाइडन ने कहा था कि चिंता की बात यह है कि अगर यह संक्रमण फैला तो इसके परिणाम भुगतने होंगे।

WHO ने की थी पुष्टि
शनिवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO) ने 11 देशों में मंकीपाक्स के 80 मामलों की पुष्टि की। बता दें कि WHO इस नई बीमारी के कारणों व इसके खतरों और बचाव को लेकर रिसर्च कर रहा है ताकि इसके पीछे के कारणों के साथ होने वाले जोखिमों का पता लगाया जा सके। गुरुवार को जारी बयान में WHO ने कहा कि यह वायरस एंडेमिक यानि स्थानीय स्तर (endemic) का है जो कुछ देशों के जानवरों में मौजूद है। इससे स्थानीय पर्यटकों व लोगों के बीच ही यह संक्रमण फैलता है।

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