बालाघाट में सबसे अधिक, अलीराजपुर में सबसे कम ओबीसी वोटर: रिपोर्ट

भोपाल
प्रदेश में सबसे अधिक ओबीसी वोटर बालाघाट में और सबसे कम अलीराजपुर जिले में निवास करते हैं। ओबीसी आरक्षण के लिए तैयार रिपोर्ट पेश होने के बाद ओबीसी नेताओं में इसको लेकर सक्रियता बढ़ गई है। इसकी वजह रिपोर्ट के आधार पर जिलों में पहले नगरीय निकायों और पंचायतों तथा बाद में विधानसभा स्तर पर ओबीसी बाहुल्य इलाकों से चुनाव लड़ने की दावेदारी किया जाना है। दूसरी ओर राज्य शासन ने सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी को 35 फीसदी ओबीसी आरक्षण दिए जाने की पिछड़ा वर्ग आयोग की जो रिपोर्ट पेश की है उसके बाद सियासत और गरमा गई है।

विपक्षी दल राज्य की स्थिति के आधार पर एमपी में ओबीसी के लिए 50 फीसदी आरक्षण तय करने की मांग कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जिलों और जनपदों में चुनावी दावेदारी करने वाले नेता अब जानकारी जुटाने में लगे हैं कि उनके जिले में किस नगरीय निकाय और जनपद, जिला पंचायत में ओबीसी वोटर ज्यादा है। इसे जीत का आधार मानते हुए यहां चुनाव घोषणा के बाद इन नेताओं की दावेदारी होना तय है।

ओबीसी रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा की सीट पर दावेदारी
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार द्वारा तैयार कराई गई रिपोर्ट के आधार पर अब पंचायत और नगरीय निकाय के साथ विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की दावेदारी करने वालों की भी सक्रियता में नए सिरे से समीकरण बनना तय है। जिन शहरी व ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में ओबीसी वोटर ज्यादा हैं, वहां ओबीसी नेताओं के चुनाव मैदान में उतरने की संख्या भी बढ़ना तय है। अब चूंकि विधानसभा चुनाव के लिए 18 माह का समय शेष बचा है, इसलिए ओबीसी की जातीय व्यवस्था के आधार पर चुनावी जंग में उतरने को आतुर यह पता कर रहे हैं कि किस जिले में किस विधानसभा सीट में ओबीसी वोटर सर्वाधिक हैं। इसके बाद यह भी साफ हो गया है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनोें ही दलों को ओबीसी नेताओं की दावेदारी के बीच सिलेक्शन में मशक्कत करनी होगी।

10 मई को आएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला
ओबीसी आरक्षण को लेकर तीन साल से टल रहे पंचायत और नगर निकायों के चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट दस मई को फैसला देने वाला है। इस बीच दो दिन पहले राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि प्रदेश में सबसे अधिक ओबीसी वोटर बालाघाट में हैं। यहां 69 प्रतिशत मतदाता ओबीसी हैं। इसके बाद राजगढ़ जिले में 67.2 और नीमच में 64.8 प्रतिशत ओबीसी वोटर हैं। दूसरी ओर सबसे कम ओबीसी वोटर संख्या वाले जिलों में अलीराजपुर का नाम सबसे आगे है। यहां 6.1, झाबुआ में 8.3 और बड़वानी में 22 प्रतिशत ओबीसी वोटर हैं। आदिवासी बाहुल्य इन जिलों में आदिवासियों की संख्या सबसे अधिक है।

राज्य स्तर पर तय हो ओबीसी आरक्षण
सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने के साथ प्रदेश में सत्ता से जुड़े ओबीसी नेताओं का कहना है कि पचास प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था केंद्र और राज्य स्तर पर तय होनी चाहिए। राज्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वे अपनी राज्य में ओबीसी आबादी अधिक होने पर उसे अधिक आरक्षण दे सकें और कुल आबादी के आधार पर एससी-एसटी के आरक्षण कम कर सकें। इसीलिए पिछड़ा वर्ग आयोग ने इसकी अनुशंसा भी केंद्र से करने के लिए कहा है। हालांकि यह फिलहाल संभव नहीं दिखाई देता है। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने 35 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण दिए जाने की जो रिपोर्ट दी है, वह सही नहीं है। पचास फीसदी आरक्षण की रिपोर्ट का एक बार फिर मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

शैक्षणिक लेवल साबित हो चुका है फिसड्डी
ओबीसी वर्ग के बच्चों का शैक्षणिक लेवल पिछले दिनों घोषित किए गए हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी के परीक्षा परिणामों में फिसड्डी साबित हो चुका है। प्रदेश में ओबीसी कैटेगिरी के सबसे अधिक छात्र फेल हुए हैं। पिछड़ा वर्ग आयोग आने वाले समय में इस शैक्षणिक स्तर को लेकर भी रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके अलावा इस वर्ग के सामाजिक और आर्थिक स्टेटस का सर्वे कर पूरे प्रदेश की रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपी जाएगी।

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