भावी शोध छात्रों को मार्गदर्शन देने के लिए भी हो कोलोक्वियम

भोपाल

प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के दूसरे दिन के सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. रामप्रसाद ने कहा कि संस्थान द्वारा भावी शोध छात्रों के मार्गदर्शन के लिये भी एक कोलोक्वियम किया जाना चाहिये। इसका लाभ शोधार्थियों सहित देश और प्रदेश के लिये आवश्यक बिन्दुओं में मिलेगा। शोध आरंभ करने से पूर्व यह मार्गदर्शन छात्र-छात्राओं का समय बचाने, लक्ष्य तय करने में मदद करने के साथ ऐसे विषयों को सामने लाने में मदद करेगा, जिनकी प्रदेश के विकास में अति आवश्यकता है। प्रशासन अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता प्रो. सुप्रवा पटनायक ने की।

शोध छात्रों ने आज पर्यावरण अध्ययन, वानिकी, निरंतर विकास, पर्यावरण विज्ञान, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, स्थाई पर्यटन, इनवायरमेंटल इंजीनियरिंग पर प्रभावी प्रस्तुतिकरण दिया। सुअंकिता सिंह ने नर्मदा क्षेत्र में बेहतर पर्यावरण के लिये रिमोट सेंसिंग विश्लेषण, सुआहेली चाकी ने मध्यप्रदेश में प्रभावी वन प्रबंधन के लिये फॉरेस्ट हेल्थ इण्डेक्स, सुजीत केसरवानी ने अखाद्य तेलों से बॉयो-डीजल निर्माण, सुसोनल सिंह ने उद्योगों के आसपास भारी विषाक्त खनिजों से उत्पन्न प्रदूषण मुक्ति के लिये संबंधित वनावरण वृद्धि के बारे में प्रेजेंटेशन दिया। सुमनीषा सिंह ने नर्मदा जल-ग्रहण क्षेत्र में भू-जल स्तर संधारण में वनों की भूमिका, प्रशांत यादव ने कान्हा नेशनल पार्क में ईको टूरिज्म, सुसृष्टि चंद्रा ने मूर्ति, पुष्प विसर्जन आदि का बॉयो रिमूवल, सुसोनाली श्रीवास्तव ने पवन ऊर्जा में ई-सपोर्ट के आधार पर हवा के प्रवाह की पूर्व जानकारी, विजय जैन ने भारतीय वनों पर हाइड्रो मीटरोलॉजिकल असेसमेंट पर प्रस्तुतिकरण दिया।

सत्र में विशेषज्ञ के रूप में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. विपिन व्यास, आईआईएफएम के प्रो. अद्वेत एडगाँवकर, मॉडरेटर एआईजीजीपीए भागवत अहिरवार और डॉ. ए.के. ग्वाल ने शोधार्थियों को अनेक सुझाव दिये। ये सुझाव शोध छात्रों के लिये ही नहीं, वरन् देश और प्रदेश के विभिन्न विकास में भी सहायक सिद्ध होंगे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *