महालेखाकार नाराज, आवासीय विद्यालयों, छात्रावासों का तीन संभागों के अफसरों से जांच प्रतिवेदन मांगा

भोपाल
प्रदेश के 34 आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बिना कोटेशन, भंडार क्रय नियमों का पालन किए बिना और क्रय समिति के अनुमोदन के बिना सामग्री खरीदी कर ली गई। इस पर महालेखाकार ने नाराजगी जताई है। इन जिलों से जुड़े तीन संभागों के अफसरों से जांच प्रतिवेदन मांगा गया है। जानकारी के मुताबिक धार, खरगौन, मंडला, शहडोल जिले के 34 आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बिना कोटेशन बुलाए ही सामग्री खरीदी कर ली गई। इसमें भंडार क्रय नियमों का पालन भी नहीं किया गया। क्रय समिति के  अनुमोदन के बिना ही सामग्री की खरीदी कर ली गई। आॅडिट जांच में यह खुलासा होने के बाद महालेखाकार ने नाराजगी जताई है। संभागीय उपायुक्त जबलपुर, इंदौर और शहडोल से जांच प्रतिवेदन मांगा गया है।

सिकल सेल एनीमिया में लाखों का बजट खर्च, स्वास्थ्य कार्ड बंटे ही नहीं
मंडला जिले में पचास लाख 55 हजार सिकल सेल एनीमिया के लिए आवंटित राशि का पूर्ण उपयोग होने के बाद भी 19 आवासीय विद्यालयों, छात्रावासों  में दस संस्थाओं में एसीए परीक्षण का आयोजन ही नहीं हुआ और जिन संस्थाओं में एसीए परीक्षण हुए वहां भी स्वास्थ्य कार्ड का वितरण नहीं हो पाया है। इस पर महालेखाकार ने नाराजगी जाहिर करते हुए मंडला जिले से जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है।

आश्रमों का निरीक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण नहीं अनारक्षित को प्रवेश
प्रदेश में जनजातीय वर्ग के लिए बने छात्रावास और आश्रमों में एसटी के अलावा अन्य वर्ग के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है। आश्रमो छात्रावासों का नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा है। छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं कराए जा रहे है। पालक समिति का गठन और नियमित बैठके भी नहीं की जा रही है। इस पर भी महालेखाकार आपत्ति जताई है। लोकलेखा समिति ने सभी जिलों से इस पर जवाब मांगा है।

नहीं दे रहे जिलों के अफसर जवाब
इन गड़बड़ियों को लेकर महालेखाकार ने आॅडिट आपत्तियां लगाई है। लोकलेखा समिति की लंबित कंडिकाओं पर जिलों के मैदानी अफसर जवाब नहीं दे रहे है। अब अपर संचालक जनजातीय कार्य ने सभी सहायक आयुक्त और जिला संयोजक जनजातीय कार्य तथा अनुसूचित विकास को पत्र लिखकर तत्काल जानकारी मेल और हार्ड कापी एवं सॉफ्ट कापी में उपलब्ध कराने को कहा है।

शौचालय, डायनिंग टेबल, खेल सामग्री और चौकीदार नही, अधीक्षक निवास नहीं करते
धार, मंडला, खरगौन और शहडोल जिलों के छात्रावास और आश्रमों में कहीं शौचालय नहीं है तो कहीं डायनिंग टेबल नहीं  है। कहीं खेल सामग्री पर्याप्त नहीं है। कहीं कहीं तो रात्रिकालीन चौकीदार ही नहीं तैनात किया गया है। अधिकांश स्थानों पर छात्रावास अधीक्षक छात्रावासों में रहते ही नहीं है। इस पर महालेखाकार में आपत्ति दर्ज कराई है। इन सभी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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