जैव विविधता को बचाकर ही निपटा जा सकता है जलवायु परिवर्तन के खतरों से

भोपाल

 

जैव विविधता को बचाकर ही जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटा जा सकता है । इस आशय के विचार आज प्रशासन अकादमी में जैव विविधता से जुडे विषयों पर रिसर्च कर रहे विदयार्थियों द्वारा उन्हें रिसर्च के लिए दिए गए विषय पर प्रेजेन्टेशन दिया गया। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा आयोजित कोलोक्वियम पीएच.डी. शोधकर्ता विद्यार्थी शामिल हुए।

जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान व्यवस्था विषय पर शोधार्थियों ने अपने विचार रखे और शोध के विषय का प्रस्तुतिकरण दिया। इन शोध विद्यार्थियों को जैव विविधता प्रबंधन, भारतीय ज्ञान व्यवस्था, विरासत संरक्षण, इकोलॉजी, इतिहास मानव शास्त्र, संस्कृति संबंधी अध्ययन और हिंदू संस्कृति का अध्ययन पर शोधार्थियों ने विचार रखे।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च भोपाल की प्रीति राय, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल से प्रतीक्षा सिंह, पूजा सौदावत, रेहमा रिजवान, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर की पुष्पलता दवार ने जैव विविधता के संरक्षण और संबंधों से जुड़े विभिन्न रिसर्च विषयों पर अपनी प्रस्तुति दी। इनमें जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता पर इसके खतरे कृषि अर्थ-व्यवस्था पर जैव विविधता की हानि के खतरे जैसे गंभीर विषय शामिल है।

सत्र की अध्यक्षता सेंटर फॉर इनोवेशन इन पब्लिक सिस्टम संचालक सी. अखिलेंद्र रेड्डी ने की। बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विपिन व्यास, विषय विशेषज्ञ डॉ अंकित अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे।

 

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