जीतू ठाकुर हत्याकांड में युवराज बरी, दो को आजीवन कारावास
इंदौर
प्रदेशभर में चर्चित रहे जीतू ठाकुर हत्याकांड में सोमवार को फैसला आ गया। पुलिस ने छह आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। इनमें से गुंडे युवराज उस्ताद सहित तीन को कोर्ट ने बरी कर दिया। दो आरोपितों को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक आरोपित की विचारण के दौरान मौत हो चुकी है।
गौरतलब है कि 23 जनवरी 2007 को जीतू ठाकुर की महू की उपजेल में हत्या हो गई थी। कुछ लोग उससे मुलाकात करने के नाम पर भीतर घुसे और उसे गोली मार दी। आरोप था कि आरोपित युवराज उस्ताद भेष बदलकर जेल में घुसा और गोली मारकर जीतू को मौत के घाट उतार दिया। आरोप लगाया गया था कि युवराज ने पिता विष्णु उस्ताद की हत्या का बदला जीतू को मारकर लिया था। हत्याकांड के कई दिन बाद तक युवराज फरार रहा। बाद में उसने मिल क्षेत्र की एक बस्ती में सरेंडर कर दिया था। युवराज की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अविनाश सिरपुरकर पैरवी कर रहे थे जबकि अभियोजन का पक्ष एजीपी गजराजसिंह सोलंकी ने रखा।
घटना के वक्त महाराष्ट्र की जेल में बंद था
युवराज की तरफ से कोर्ट में तर्क रखे गए थे कि उसका हत्याकांड से कुछ लेना देना नहीं है। 23 जनवरी 2007 को जिस दिन जीतू ठाकुर की महू की उपजेल में गोली मारकर हत्या की गई थी उस दिन युवराज एक अन्य मामले में महाराष्ट्र की जेल में बंद था। जब वह जेल में बंद था तो फिर हत्या कैसे कर सकता है। कोर्ट ने एडवोकेट सिरपुरकर के इस तर्क को सही मानते हुए युवराज को बरी कर दिया है। सोमवार को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यशवंत, करण और युवराज उस्ताद को बरी कर दिया जबकि अशोक सूर्यवंशी और विक्की उर्फ विनोद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले के एक आरोपित अशोक मराठा की विचारण के दौरान मौत हो चुकी है।
