धनुष तोप के कम्पोनेंट बनाने इंडस्ट्री में विकसित करेगा गुजरात
जबलपुर
धनुष तोप के कम्पोनेंट के उत्पादन की अपने क्षेत्र में सम्भावनाएं तलाशने के लिए शनिवार को गुजरात चेम्बर ऑफ इंडस्ट्री का एक दल जबलपुर आएगा। वह गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) उत्पादन अनुभाग का निरीक्षण करेगा। एडवांस्ड वेपंस एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (एडब्ल्यूईआइएल) के डायरेक्टर ऑपरेशन एके मौर्य भी जीसीएफ आएंगे।
रक्षा कंपनी एडब्ल्यूईआइएल के अंतर्गत जीसीएफ में 155 एमएम 45 कैलीबर धनुष तोप का उत्पादन किया जा रहा है। इस तोप में एक लाख से अधिक छोटे एवं बडे़ कम्पोनेंट इस्तेमाल होते हैं। इनमें कुछ देश की आयुध निर्माणियां बनाती हैं। ये ज्यादातर प्राइवेट वेंडर्स से लिए जाते हैं। इसी तारतम्य में गुजरात चेम्बर का दल यहां पर आ रहा है। वह देखेगा कि ऐसे कौन से कम्पोनेंट हैं, जिन्हें वह अपने क्षेत्र की इंडस्ट्री में विकसित कर सकते हैं।
दरअलस धनुष भारतीय सेना की 155 मिमी टोड होवित्जर तोप है। यह पूरी तरह से देश में ही बनी तोप है। जिसे खरीदने के लिए आज बड़े-बड़े देश उत्सुकता दिखाते हैं। धनुष नामक इस तोप पर कई वर्षों से काम चल रहा था। इस तोप का उन्नत संस्करण कुछ साल पूर्व ही बनकर तैयार हुआ है। इस तोप को दुनिया की बेहतरीन तोपों में से एक माना जाता है। इस तोप को कुछ समय पूर्व ही भारतीय सेना में शामिल किया जा चुका है।
ढलाई वाले आइटम पर जोर
जीसीएफ की तरफ से धनुष तोप में ढलाई (कास्टिंग) एवं फोर्जिंग वाले कम्पोनेंट की जानकारी प्रबंधन की तरफ से दी जाएगी। वे इसकी सप्लाई कर सकते हैं। अन्य कम्पोनेंट के बारे में भी बताया जाएगा। हाल ही में पोकरण में हुए परीक्षण के बाद तोप की परीक्षण सम्बंधी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
सेना को भेजी एक दर्जन तोप
जीसीएफ ने अपने यहां से धनुष तोप को सीधे यूजर को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ समय पहले क दर्जन तोप भेजी गई हैं। जल्द ही इनकी तैनाती बॉर्डर पर की जा सकेगी। जीसीएफ के अपर महाप्रबंधक एवं जनसम्पर्क अधिकारी संजय श्रीवास्तव ने बताया कि तोप रवाना कर गई है। उन्होंने बताया कि गुजरात चेम्बर का दल जीसीएफ का भ्रमण करेगा। यह एक नियमित प्रक्रिया है। इससे पहले भी निजी वेंडर्स यहां आते रहे हैं।
