डीटीई कराएगा प्रदेश में एमबीए, एमटेक और एमफार्मा की 89 हजार 286 सीटों प्रवेश
भोपाल। देशभर में प्रदेश के तकनीकी शिक्षा विभाग के संस्थानों की गंूज सुनाई दे रही है। इसकी वजह प्रदेश में सबसे ज्यादा पीजी कोर्स की सीटें होने के बाद सबसे ज्यादा प्रवेश देने की स्थिति बनी हुई है।
आगामी सत्र में सीटों की संख्या एक लाख तक पहुंच सकती है, जिसमें डीटीई प्रवेश कराएगा। वहीं यूजी कोर्स में सातवें नंबर का स्थान होने के बाद भी प्रवेश का ग्राफ दूसरे नंबर पर बना हुआ है। यही कारण है कि यूपी-बिहार के अलावा महाराष्टÑ के विद्यार्थी प्रदेश के कॉलेजों में प्रवेश लेने यूजी-पीजी की डिग्री ले रहे हैं।
प्रदेश में एमबीए, एमटेक और एमफार्मा की 89 हजार 286 सीटें मौजूद हैं। प्रदेश के किसी भी राज्य में इतनी संख्या में सीटें मौजूद नहीं हैं। यही नहीं उक्त सीटों पर प्रवेश का ग्राफ भी सबसे ऊपर बना हुआ है। आगामी सत्र 2022-23 में सीटों की संख्या करीब एक लाख तक पहुंच सकती है। क्योंकि कई कॉलेज कतार में खडेÞ हुये हैं। गत वर्ष चालीस एमबीए कॉलेजों का मान्यता मिलने के बाद सीटों का ग्राफ तीस हजार तक पहुंच गया था। इसके बाद एमटेक, एमफार्मा और अन्य पीजी कोर्स की सीटों पर भी तकनीकी शिक्षा विभाग प्रवेश दे रहा है। एमबीए के अलावा एमटेक, एमफार्मा और एमसीए का प्रवेश का ग्राफ देशभर में सबसे ज्यादा है।
एआईसीटीई ने बीटेक और बीएफार्मा के नये कालेजों को स्थापित करने की तीन साल से रोक लगा रखी है। प्रदेश में कालेजों की संख्या बढने के साथ रिक्त सीटों का ग्राफ और बढ सकता था। हालांकि एआईसीटीई दो सत्रों पर इंजीनियरिंग के नये कालेजों पर रोक लगा कर रखेगा, ताकि इंजीनियरिंग की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
7वें नंबर पर बीटेक और बीफार्मा पर भरोसा
प्रदेश के बीटेक और बीफार्मा की सीटों का ग्राफ देश में सातवें नंबर पर बना हुआ है। सीटें कम होने के बाद भी रिक्त का ग्राफ ज्यादा ऊपर जाने लगा है। इसकी वजह प्रदेश में बढे हुये इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या है। वहीं बढ़ी फीस और गिरती गुणवत्ता के कारण के दूसरे राज्यों के विद्यार्थियों का पलायन शुरू हो गया है। पड़ोसी राज्यों के मुकाबले प्रदेश की फीस बहुत कम है। इसलिये विद्यार्थी मप्र में प्रवेश लेते हैं। क्योंकि उनकी सरकार उन्हें प्रदेश में पढ़ने की स्कॉलरशिप देती है। गुणवत्ता गिरने के कारण उप्र, बिहार के अलावा महाराष्टÑ के विद्यार्थियों के प्रवेश के ग्राफ में गिरावट दर्ज हुई है। यहां तक प्रवेश के विद्यार्थी दूसरे राज्यों के प्रवेश लेने की कवायद में लगे रहते हैं।
