प्रसव के दौरान गर्भ में फटी शिशु की आंत, ऑपरेशन कर बचाई जान

 गोरखपुर

गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने नवजात की जान बचा ली। प्रसव के दौरान नवजात की आंत फट गई थी। जन्म के चार दिन बाद तबीयत बिगड़ने पर हुई जांच में इसकी जानकारी हुई। उसकी आंत अविकसित थी। दो टुकड़ों में बनी हुई आंत भी फट गई थी। मल पेट में फैल गया था। हरे व पीले रंग की उल्टी हो रही थी। पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. रेनू कुशवाहा ने डॉक्टरों की मदद से ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली है।

कुशीनगर के सेवरही निवासी संदीप शर्मा की पत्नी शिमला ने तीन अप्रैल को कुशीनगर में एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म के बाद से ही उसका पेट फूलने लगा, उल्टी करने लगी। डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार के निर्देश पर उसे नियो नेटल इंटेसिव केयर यूनिट (एनआइसीयू) में चार अप्रैल को भर्ती कराया गया। एक्सरे और खून की जांच के बाद 11 अप्रैल को उसका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन में एनेस्थीसिया के डॉ. नरेंद्र देव व एनआइसीयू के डॉ. कुलदीप सिंह व उनकी टीम का सहयोग रहा।

10 हजार में किसी एक को यह समस्या
डॉ. रेनू ने बताया कि जन्म से ही आंत अविकसित होने को जेजुनल अट्रेजिया कहते हैं। 10 हजार में किसी एक बच्चे को यह दिक्कत होती है। इस बच्ची को डायवर्टिकुलम (अविकसित आंत के एक हिस्से का फूल जाना) भी था। इसकी वजह से संक्रमण तेजी से बढ़ा और आंत फट गई। इसके बाद वह गंभीर हो गई।

 

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