यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज की कक्षाओं करने ,नेशनल मेडिकल कमीशन से राय मांगी
भोपाल
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के चलते यूक्रेन से सौ से ज्यादा चिकित्सा विद्यार्थी प्रदेश के विभिन्न शहरों में लौटकर आए हैं। अभी यूक्रेन में हालात सामान्य होने तक उन्हें यहां अपने घरों पर ही रहना होगा। ऐसे में इन विद्यार्थियों ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज की कक्षाओं में शामिल होने और पुस्तकालय में अध्ययन करने की अनुमति मांगी है। उधर यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों से इन विद्यार्थियों को यह पत्र भी मिला है कि वह जहां पर रह रहे हैं, वहीं के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर सकते हैं।
यूक्रेन से लौटे छात्रों की मांग पर चिकित्सा शिक्षा विभाग में नेशनल मेडिकल कमीशन को पत्र लिखकर राय मांगी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नेशनल मेडिकल कमीशन के मापदंड पर ही प्रदेश के सभी कालेज संचालित होते हैं। अतिरिक्त छात्रों को कक्षा, इंटर्नशिप और पुस्तकालय समेत अन्य जगह अनुमति देने पर नेशनल मेडिकल कमीशन को आपत्ति हो सकती है। ऐसे में एनएमसी की राय जरूरी है।
बता दें कि यूक्रेन में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश आसानी से मिल जाता है, जबकि भारत में किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा में मेरिट में आना चुनौती भरा होता है। भारत के मुकाबले पढ़ाई खर्चीली होने के बावजूद मध्य प्रदेश समेत देशभर से बड़ी संख्या में विद्यार्थी यूक्रेन, रूम और चीन में जाकर मेडिकल की पढ़ाई करते हैं। भारत में प्रैक्टिस करने के लिए उन्हें एक परीक्षा पास करनी होती है।
यूक्रेन से लौटे विद्यार्थी मिले थे। उनकी मांगों के संबंध में नेशनल मेडिकल कमीशन से राय मांगी गई है। इसी के अनुरूप उनकी मदद की जा सकेगी।
– विश्वास सारंग, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, मप्र शासन
