CM Infra के चौथे चरण की स्कीम का खाका तैयार, इस बार सड़कों पर फोकस
भोपाल
शिवराज सरकार शहरी मतदाताओं को लुभाने के लिए एक बार फिर मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना (सीएम इन्फ्रा) लॉन्च होगी. यह योजना का चौथा चरण होगा. इसमें 90 प्रतिशत राशि मोहल्लों व कॉलोनियों की सड़कों पर खर्च होंगे.
शिवराज सरकार में सबसे पहले 2011-12 में सीएम इंफ्रा का पहला चरण लाया गया था. 2013 के विधानसभा चुनाव में शहरों में भाजपा 80 प्रतिशत सीटें जीत गई थीं. भाजपा के सर्वे के मुताबिक इसमें बड़ा योगदान इस स्कीम का था. माना जाता है कि यह भाजपा का कोर वोटर है. लिहाजा 2016 में भी इस स्कीम का दूसरा चरण लाया गया. कांग्रेस ने भी इसकी अहमियत समझी और तुरंत ही 2019 में इसका तीसरा चरण लॉन्च कर दिया था. अब एक बार फिर शिवराज सरकार इस स्कीम पर भरोसा कर रही है. चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के मुताबिक नगरीय निकायों के पास इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए फंड की कमी होती है. इस स्कीम के जरिए शहरों में बुनियादी ढांचे में सुधार होगा.
सिर्फ 20 प्रतिशत राशि देनी होगी नगरीय निकायों को
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने चौथे चरण की स्कीम का खाका तैयार कर लिया है. कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा. ये स्कीम करीब 1700 करोड़ की होगी. इसमें 20 फीसदी राशि नगरीय निकायों को ग्रांट मिलेगी. बाकी बची 80 प्रतिशत राशि का इंतजाम लोन से किया जाएगा. इस 80 प्रतिशत में भी 25 फीसदी हिस्सा नगरीय निकायों को चुकाना होगा, बचे 75 प्रतिशत लोन की राशि राज्य शासन चुकाएगी. यानी नगरीय निकायों को कुल प्रोजेक्ट राशि का सिर्फ 20 प्रतिशत देना होगा और बाकी भार राज्य सरकार उठाएगी.
इस स्कीम की जरूरत क्यों
नगरीय निकाय अभी तक अपने बजट से तनख्वाह, साफ-सफाई और पानी सप्लाई की व्यवस्था ही कर पाते हैं. विकास के लिए उनके पास अलग से कोई बड़ा बजट नहीं बचता है. उन पर मुख्यमंत्री की घोषणाओं को पूरा करने का भी दबाव रहता है. इसलिए मुख्यमंत्री अधोसंरचना स्कीम के जरिए सड़कें, फुटपाथ, ब्रिज, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, स्ट्रीट लाइट, पार्क और नालों का विकास कार्य करने के लिए राज्य सरकार से राशि मिल जाती है. हालांकि, इस बार अन्य विकास कार्यों की अपेक्षा सड़कों को ही वरीयता दी जा रही है.
भोपाल को मिल सकते हैं 200 करोड़
भोपाल नगर निगम को इस स्कीम के पहले और दूसरे चरण में करीब 180 करोड़ रुपए मिले थे. इससे भोपाल में जगह-जगह कॉलोनियों में सीमेंट कांक्रीट की सड़कें बनाई गई थीं. इस बार भी भोपाल को करीब 200 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है. इस रकम का बड़ा हिस्सा भोपाल की जर्जर सड़कों को रिनोवेट करने पर खर्च किया जाएगा. साथ ही नई कॉलोनियों में अप्रोच रोड व पुरानी कॉलोनियों में सीवरेज व पानी सप्लाई के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत करने में भी रकम खर्च की जाएगी.
