शहजाद हो या गणेश, बुलडोजर के लिए सब एक: जहांगीरपुरी में एक धर्म को निशाना बनाए जाने के दावों की सच्चाई

नई दिल्ली
दिल्ली निगम की कार्रवाई को लेकर सियासी दल भले ही इसे कोई भी रंग दे रहे हों लेकिन सच्चाई यही है कि बुधवार को नगर निगम के बुलडोजर ने गणेश गुप्ता की दुकान ढहाई तो शहजाद के खोखे को भी गिरा दिया।

कागज दिखाते रह गए
जहांगीरपुरी स्थित कुशल चौक पर हुई कार्रवाई के बारे में गणेश गुप्ता ने बताया कि वह डीडीए की ओर से दुकान आवंटन का कागज दिखाते रह गए लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। देखते ही देखते उनकी दुकान के काफी हिस्सों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। 54 वर्षीय गणेश ने बताया कि 1977 में डीडीए ने जहांगीरपुरी में 13 दुकानों का आवंटन किया था। इनमें से एक दुकान उनके पिता श्रीचंद गुप्ता के नाम पर कुशल चौक पर आवंटित हुई थी, जो अब उनके नाम पर है। उन्होंने बताया कि दुकान का सालाना 4800 रुपये किराया भी भरते हैं, जिसकी सभी रसीदें उनके पास हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी दुकान का आवंटन किया गया है तो वह अवैध कैसे हो सकती है। अगर दुकान अवैध है तो फिर एमसीडी को नोटिस देना चाहिए था, लेकिन मेरे पास कोई नोटिस नहीं आया। मेरे परिवार में चार बच्चे, एक बेटे की बहू और पत्नी है। सभी का गुजारा इसी दुकान से चलता है। करीब छह लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि वे इस मामले के खिलाफ अदालत की शरण लेंगे।

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