PM मोदी-हनुमानजी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के अहम सूत्र
मोरबी
हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) ने गुजरात के मोरबी में शनिवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए हनुमान जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार हनुमानजी चार धाम परियोजना के तहत देश के चारों दिशाओं में बनाई जा रही भगवान की प्रतिमाओं में से यह दूसरे नंबर की है। मोरबी में बापू केशवानंद जी के आश्रम में यह प्रतिमा स्थापित की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'हजारों वर्षों से बदलती स्थितियों के बावजूद भारत के अटल और अडिग रहने में हमारी सभ्यता और संस्कृति की बड़ी भूमिका रही है। हमारी आस्था और संस्कृति की धारा सद्भाव, समावेश, समभाव की है। इसलिए जब बुराई पर अच्छाई को स्थापित करने की बात आई तो प्रभु राम ने सक्षम होते हुए भी, सबका साथ लेने का, सबको जोड़ने का, समाज के हर तबके के लोगों को जोड़ने का और सबको जोड़कर उन्होंने इस काम को संपन्न किया। यही तो है सबका साथ–सबका प्रयास। प्रधानमंत्री में देश में एकता पर जोर देते हुए कहा कि रामकथा का आयोजन भी देश के अलग–अलग हिस्सों में किया जाता है। भाषा–बोली जो भी हो, लेकिन रामकथा की भावना सभी को जोड़ती है, प्रभु भक्ति के साथ एकाकार करती है। यही तो भारतीय आस्था की, हमारे आध्यात्म की, हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा की ताकत है।'
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, 'सबका साथ, सबका प्रयास का उत्तम प्रमाण प्रभु राम की जीवन लीला भी है। जिसके हनुमानजी बहुत अहम सूत्र रहे हैं। सबका प्रयास की इसी भावना से आजादी के अमृत काल को हमें उज्जवल करना है, राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिए जुटना है।' प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान श्री राम और भगवान हनुमान को देश के विकास कार्य और देश की सेवा के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा, 'हजारों वर्षों से बदलती स्थितियों के बावजूद भारत के अटल और अडिग रहने में हमारी सभ्यता और संस्कृति की बड़ी भूमिका रही है। हमारी आस्था और संस्कृति की धारा सद्भाव, समावेश, समभाव की है।'
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, 'हनुमान वो शक्ति हैं जिन्होंने समस्त वनवासी प्रजातियों और वन बंधुओं को मान और सम्मान का अधिकार दिलाया।' प्रधानमंत्री मोदी ने हनुमान जन्मोत्सव की सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने कहा, 'हनुमान जी अपनी भक्ति से, अपने सेवाभाव से, सबको जोड़ते हैं। हर कोई हनुमान जी से प्रेरणा पाता है। हनुमान वो शक्ति और सम्बल हैं जिन्होंने समस्त वनवासी प्रजातियों और वन बंधुओं को मान और सम्मान का अधिकार दिलाया। इसलिए एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भी हनुमान जी एक अहम सूत्र हैं।'
प्रधानमंत्री ने संबोधन की शुरुआत में कहा, 'आज मोरबी में हनुमान जी की इस भव्य प्रतिमा का लोकार्पण हुआ है। ये देश और दुनिया भर के हनुमान भक्तों के लिए, रामभक्तों के लिए बहुत सुखदायी है, आप सभी को बहुत–बहुत बधाई।'
हनुमानजी सबको जोड़ते हैं
इस मौके पर मोदी ने कहा–हनुमान जी अपनी भक्ति से, अपने सेवाभाव से, सबको जोड़ते हैं। हर कोई हनुमान जी से प्रेरणा पाता है। हनुमान वो शक्ति और सम्बल हैं जिन्होंने समस्त वनवासी प्रजातियों और वन बंधुओं को मान और सम्मान का अधिकार दिलाया। इसलिए एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भी हनुमान जी एक अहम सूत्र हैं।
इससे पहले मोदी ने कहा–हनुमान जयंती के पावन पर्व पर आप सभी को, समस्त देशवासियों को बहुत–बहुत शुभकामनाएं। इस पावन अवसर पर आज मोरबी में हनुमान जी की इस भव्य मूर्ति का लोकार्पण हुआ है। ये देश और दुनिया भर के हनुमान भक्तों के लिए, रामभक्तों के लिए बहुत सुखदायी है, आप सभी को बहुत–बहुत बधाई।
देश की चारों दिशाओं में स्थापित की जा रहीं प्रतिमाएं
#हनुमानजी4धाम परियोजना के तहत भारत की चारों दिशाओं में हनुमानजी की विशाल प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं। मोरबी की प्रतिमा दूसरी है। इस प्रतिमा की स्थापना पश्चिम में मोरबी में परम पूज्य बापू केशवानंद जी के आश्रम में की गई है। इसी सीरिज की पहली मूर्ति वर्ष 2010 में उत्तर में शिमला में स्थापित की गई थी। जबकि दक्षिण में रामेश्वरम में हनुमान जी की प्रतिमा पर काम शुरू हो गया है।
सबका साथ, सबका प्रयास
सबका साथ, सबका प्रयास का उत्तम प्रमाण प्रभु राम की जीवन लीला भी है। जिसके हनुमानजी बहुत अहम सूत्र रहे हैं। सबका प्रयास की इसी भावना से आजादी के अमृत काल को हमें उज्जवल करना है, राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिए जुटना है। हजारों वर्षों से बदलती स्थितियों के बावजूद भारत के अटल और अडिग रहने में हमारी सभ्यता और संस्कृति की बड़ी भूमिका रही है। हमारी आस्था और संस्कृति की धारा सद्भाव, समावेश, समभाव की है। इसलिए जब बुराई पर अच्छाई को स्थापित करने की बात आई तो प्रभु राम ने सक्षम होते हुए भी, सबका साथ लेने का, सबको जोड़ने का, समाज के हर तबके के लोगों को जोड़ने का और सबको जोड़कर उन्होंने इस काम को संपन्न किया।
रामकथा का आयोजन देशभर में होता है
रामकथा का आयोजन भी देश के अलग–अलग हिस्सों में किया जाता है। भाषा–बोली जो भी हो, लेकिन रामकथा की भावना सभी को जोड़ती है, प्रभु भक्ति के साथ एकाकार करती है। यही तो भारतीय आस्था की, हमारे आध्यात्म की, हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा की ताकत है। इसने गुलामी के मुश्किल कालखंड में भी अलग अलग हिस्सों और अलग अलग वर्गों को जोड़ा, आजादी के राष्ट्रीय संकल्प के लिए एकजुट प्रयासों को सशक्त किया।
