किसानों के लिए बड़ी आफत बनने जा रही है खाद, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ी कीमत
नई दिल्ली।
खरीफ की बुवाई का सीजन आ रहा है और देश में उर्वरकों का संकट लगातार बढ़ रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। भारत में विशेष रूप से फॉस्फेटिक और पोटेशियम उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत ने फरवरी में उर्वरकों की लंबी अवधि की आपूर्ति के लिए रूस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की थी। अगर यह सौदा होता, तो भारत को वैश्विक कीमतों में इजाफा होने के बावजूद स्थिर दरों पर आयात में मदद मिलती।
इस महीने की शुरुआत में देश के स्टॉक में लगभग 25-30 लाख टन डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी), पांच लाख टन म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (एमओपी) और 10 लाख टन नाइट्रोजन, फॉस्फोरस ,पोटाश और सल्फर के जटिल उर्वरकों (एनपीकेएस) के होने का अनुमान था। जबकि अकेले खरीफ सीजन में डीएपी की खपत करीब 50 लाख टन होती है।
खाद की कीमतों में इजाफा
देश में सबसे अधिक खपत वाले उर्वरक यूरिया की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1,200 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। इसके अलावा, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के लिए आवश्यक फॉस्फोरिक एसिड की कीमत बढ़कर 2,025 डॉलर प्रति टन हो गई है। इस समय देश में करीब 30 लाख टन डीएपी का स्टॉक है।
देश में पिछले माह डीएपी की कीमत में 150 रुपये प्रति बैग (50 किलो) की बढ़ोतरी के बावजूद घाटा काफी ज्यादा हो रहा है। सरकार ने पिछले साल मई, 2021 और उसके बाद अक्तूबर, 2021 में डीएपी पर सब्सिडी में भारी बढ़ोतरी कर इसकी कीमत को 1200 रुपये प्रति बैग पर स्थिर रखा था। लेकिन आयात कीमतों और कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते मार्च, 2022 में कंपनियों ने डीएपी की कीमत को बढ़ाकर 1350 रुपये प्रति बैग कर दिया है। इस समय डीएपी का बिक्री मूल्य 27 हजार रुपये प्रति टन है। सरकार हर साल अप्रैल से एनबीएस योजना के तहत उर्वरकों पर सब्सिडी की दरें अधिसूचित करती है। लेकिन अभी तक नई दरें अधिसूचित नहीं हुई हैं।
इन देशों से होता है आयात
भारत प्रमुख तौर पर रूस, चीन, यूएई, अमेरिका, इराक, सऊदी अरब, हांगकांग, जापान और सिंगापुर जैसे देशों से उर्वरकों का आयात करता है। हालांकि म्यूरेट ऑफ़ पोटाश की आपूर्ति के लिए भारत ने कनाडा, जॉर्डन और इजराइल से अनुबंध किया है।
हरिद्वार में सबसे ज्यादा किल्लत
हरिद्वार जिले में खाद की किल्लत सबसे ज्यादा है। यहां यूरिया तो पर्याप्त है पर डीएपी की कमी है। डीएपी के 50 किलो के कट्टे पर 150 रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। पथरी किसान सहकारी समिति के सचिव चरण सिंह ने बताया कि 1200 रुपये में मिलने वाला डीएपी का कट्टा अब 1350 रुपये में मिल रहा है। कुमाऊं मंडल में खाद संकट नहीं है।
एनपीके और जिंक महंगी हुई
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के 16 जिलों में यूरिया के दाम नहीं बढ़े। डीएपी, एनपीके और जिंक प्रति बोरी 150 रुपए महंगी हुई है। सल्फर की खाद 50 रुपए प्रति किलो महंगी हुई है। सिर्फ हरदोई में एक साल से पोटाश और जिप्सम की किल्लत है। विक्रेताओं का कहना है पोटाश पर सब्सिडी देनी पड़ती है और बाहर से आयात होता है। आयात कम किए जाने की वजह से पोटाश नहीं मिल रही है। कृषि सुधार केंद्रों पर हर साल जिप्सम आया करती थी, वह भी कई साल से नहीं आ रही है
यूरिया को छोड़ सभी उर्वरकों के मूल्य में हुई वृद्धि
बिहार मुजफ्फरपुर में उर्वरक की बढ़ी कीमतों के बीच जिले में पोटाश की कमी है। वर्तमान समय में यूरिया को छोड़ अन्य सभी उर्वरकों की कीमत में वृद्धि हुई है। यूरिया के 45 किलो वाले बैग की कीमत 266.50 रुपया है। वहीं इफको डीएपी की कीमत वृद्धि के साथ 1350 रुपये है। जबकि अन्य कंपनियों की कीमत 1500 रुपये है। पोटाश की कीमत पूर्व में एक हजार रुपये थी। यह अब बढ़कर 1650 रुपये तक पहुंच गई है।
एक बोरी पर 150 रुपये बढ़े
यूपी के बरेली में डीएपी पर 15 दिन पहले ही 150 रूपए कट्टा पर वृद्धि हुई है। पहले 1200 रुपए का कट्टा मिलता था, अब 1350 का हो गया है। 3000 कट्टे पर प्रिंट रेट होते हैं, 1650 रुपए सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। उप निदेशक कृषि धीरेंद्र सिंह का कहना है, खाद की बरेली में कमी नहीं है।
