कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का एक्सीडेंट, गंगा के पास दो बार पलटी खाई कार
भोपाल
मध्यप्रदेश के सीहोर वाले कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा शुक्रवार को उत्तराखंड के नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से दर्शन कर कथा स्थल की ओर लौट रहे थे, तभी उनका एक्सीडेंट हो गया। उनकी कार पहाड़ से टकरा कर दो बार पलटी खा गई। हालांकि पंडित प्रदीप मिश्रा समेत कार में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं। गंगा के पास दो बार पलटी खाई कार आपको बता दें प्रदीप मिश्रा हरिद्वार में शिव महापुराण की कथा करने के लिए गए हैं। हादसे के बाद भी कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने कथा स्थल पर पहुंचकर भक्तों को शिव महापुराण की कथा भी सुनाई।
कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का एक्सीडेंट हादसा कैसे हुआ हरिद्वार से करीब 52 किलोमीटर दूर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन के लिए प्रदीप मिश्रा निकले थे। इस दौरान उनके साथ तीन अन्य गाड़ियां भी चल रही थी। दर्शन करने के बाद जब मिश्रा जी वापस कथा स्थल की ओर लौट रहे थे, तभी तेज रफ्तार होने की वजह से नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर से करीब 5 किलोमीटर दूर उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पहाड़ी से जा टकराई। क्योंकि कार की रफ्तार अधिक थी, इसलिए कार दो बार पलटी खाई। जहां उनकी कार पलटी खाई। वहां एक तरफ गंगा नदी का किनारा और दूसरी तरफ पहाड़ था। हादसे की सूचना मिलते ही घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुट गई। उनके साथ चल रहे भक्तों व अन्य लोगों ने मिलकर गाड़ी के अंदर फंसे पंडित मिश्रा सहित अन्य लोगों को बाहर निकाला। यहां से प्रदीप मिश्रा दूसरी कार से हरिद्वार पहुंचे। पंडित जी ने कथा में सुनाई आपबीती कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा शिव पुराण कथा कर रहे पंडित मिश्रा ने कथा के दौरान हादसे की पूरी कहानी बताई। वे बोले- आज हम 52 किलोमीटर दूर नीलकंठेश्वर महादेव के दर्शन करने गए थे। उन्होंने कहा मंदिर ऊंचाई पर है और रास्ता भी छोटा है।
पास से ही गंगा जी बह रही हैं। वापस लौट कर आ रहे थे। करीब 5 किलोमीटर नीचे आए होंगे। चार गाड़ी गई थी, जिस गाड़ी में हम बैठे थे, वह पहाड़ से टकरा गई। टकराकर वह गाड़ी पलट गई। एक पलटी खाई रास्ता छोटा है। यह सुबह 8:30 बजे की बात है। बाबा की कृपा ऐसी थी कि अगर एक पलटी और खाती तो गाड़ी गंगा जी में चली जाती। उन्होंने बताया कि गाड़ी में जब भी हम चलते हैं तो श्री शिवाय नमस्तुभयम का जाप करना हमारी आदत है। मंदिर और गाड़ी में भी श्री शिवाय नमस्तुभयम का जाप करते हैं। गाड़ी की दशा आप देख रहे होंगे पूरी उल्टी हो गई। चारों पहियें ऊपर हो गए। खिड़की, दरवाजे सब चपटे आ गए। फिर भी मेरे महादेव ने ऐसी करुणा की कि हमको तो लगता है, कि मेरे शिव ने जगदंबा के साथ आकर गोदी में झेलकर हमें यहां छोड़ दिया। ये है शिव कृपा।
