संगठन से बड़ा व्यक्ति नहीं… बीएल संतोष ने वसुंधरा राजे को दिया संकेत! बयान से लग रहे कयास

 जयपुर
 

भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष की एक टिप्पणी ने राजस्थान की सियासत में कयासों को तेज कर दिया है। गुरुवार को राजस्थान के प्रदेश पदाधिकारियों और मोर्चे के नेताओं को संबोधित करते हुए बीएल संतोष ने कहा कि संगठन से बड़ा व्यक्ति नहीं है। उन्होंने अपनी टिप्पणी में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीत संगठन से होती है। ऐसे में संगठन की मजबूती पर ध्यान रखना होगा।

किसी का नाम लिए बिना बीएल संतोष ने कहा कि बेवजही की बयानबाजी से पार्टी को नुकसान होता है। इसलिए बयानबाजी करने से परहेज करना चाहिए। बीएल संतोष के बयान को वसुंधरा समर्थक कटाक्ष के तौर पर मान रहे हैं। वसुंधरा समर्थक लगातार मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन बीएल संतोष ने संकेत दिया है कि इस बार वसुंधरा के लिए राह आसान नहीं होगी।

मिशन 2023 की रणनीति पर मंथन
बीएल संतोष ने राजधानी जयपुर स्थित प्रदेश भाजपा के कार्यालय में पार्टी के पदाधिकारियों के साथ मिशन 2023 की रणनीति पर मंथन किया। लेकिन बीएल संतोष विभिन्न धड़ों को एकजुट करने में विफल रहे। वसुंधरा समर्थक पदाधिकारी बैठक से नदारद रहे। प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को छोड़कर बड़े नेता भी बीएल संतोष से मिलने के लिए नहीं पहुंचे। प्रदेश भाजपा नेताओं के रवैये से नाराज बीएल संतोष ने नसीहत दी कि कोई गहलफहमी नहीं रहे। सबसे बड़ा संगठन होता है। पार्टी में गुटबाजी और खेमेबाजी नहीं चलेगी। संतोष ने कहा कि राजस्थान में चुनाव जीतने पर फोकस होना चाहिए। सब को मिलकर काम करना चाहिए। तभी भाजपा की वापसी होगी। हमारे पास डेढ़ साल बचे हैं। हमें एकजुट होकर चुनाव की तैयारी करनी होगी।

गुटबाजी से नाराज बीएल संतोष
राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच खींचतान चल रही है। कई धड़ों में बंटी राजस्थान की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा यदि चुनाव से पहले नेताओं से मतभेद खत्म नहीं करती है तो राज्य में भाजपा की राह आसान नहीं होगी। राजस्थान में जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आता जा रहा है, भाजपा के भीतर नेताओं को गुटों में शह और मात का खेल भी तेज होता जा रहा है। वसुंधरा समर्थक रोजाना नित नए बयान देकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। चाहे अमित शाह का जयपुर दौरा हो फिर वसुंधरा राजे की देवदर्शन यात्रा। भाजपा में गुटबाजी खुलकर देखने को मिल रही है। अपने दौरे के दौरान राष्ट्रीय महामंत्री पार्टी में गुटबाजी से नाराज दिखाई दिए।

 

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