गिफ्टेड और नवाचार विद्यार्थियों को बीटेक, MBA और B.Pharma में निशुल्क प्रवेश देगा AICTE

भोपाल
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) गिफ्टेड और नवाचार करने वाले विद्यर्थियों को अपने हरेक संस्थान में दो-दो सीटों पर प्रवेश देगा। इसके लिये विद्यार्थियों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसी तरह सभी निजी और सरकारी पालीटेक्निक में प्रधानमंत्री केयर के तहत दो-दो सीटों पर कोरोना काल में अनाथ हुये विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा।  

एआईसीटीई एमबीए, एमटेक, बीटेक, एमसीए, बीफार्मा और डीफार्मा कालेजों के साथ पालीटेक्निक में दो-दो सीटों पर उन विद्यार्थियों को प्रवेश देगा, जो गिफ्टेड हैं। यहां तक विद्यार्थियों ने कोई नवाचार किया है। ऐसे विद्यार्थी निशुल्क सीट पर प्रवेश हासिल करने के हकदार होंगे। इस संबंध में एआईसीटीई के आरओ सीएस वर्मा ने कहाकि गिफ्टेड विद्यार्थी की परिभाष राष्टÑीय शिक्षा नीति में बताई गई है। इसके लिये अलग से नियमावली तैयार की जा रही है। काउंसलिंग शुरू होने के पहले गाइडलाइन जारी कर प्रवेश दिये जाएंगे। वहीं सूबे में 137 निजी और सरकारी पालीटेक्निक संचालित हो रही हैं। सभी पालीटेक्निक कोरोनाकाल के दौरान अनाथ हुये विद्यार्थियों को अपनी हरेक ब्रांच की दो-दो सीटों पर निशुल्क प्रवेश देंगे।

ये सीटें पीएम केयर कोटे के तहत आवंटित की जाएंगी। इस संबंध में तकनीकी शिक्षा विभाग को एआईसीटीई की 2022-23 की हैंडबुक भेज दी गई है। इसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कोविड में अनाथ हुये विद्यार्थियों को पीएम केयर कोटे के तहत प्रवेश दिये जाएंगे। आगामी सत्र में प्रवेश देने के लिये विभाग सभी पालीटेक्निक का डाटा तैयार कर रहा है। इसमें दो-दो सीटों को पीएम केयर कोटे में शामिल किया जाएगा। हालांकि महिला बाल विकास विभाग में करीब डेढ हजार विद्यार्थियों के अनाथ होने का डाटा पहुंच गया है, जिसमें बच्चे के माता और पिता कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर मृत्यु हुई है। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुनील कुमार गुप्ता भी इंजीनियरिंग कालेजों में कोरोना संक्रमण से अनाथ हुये विद्यार्थियों को निशुल्क प्रवेश कराने के लिये शासन से गुहार लगा चुके हैं। उनकी गुहार भी आगामी सत्र की काउंसलिंग के दौरान अपना असर दिखाएगी।

नये प्रावधान का होगा समायोजन
उच्च शिक्षा विभाग ने गत वर्ष गाइडलाइन के बिंदु क्रमांक 13 में स्पष्ट कहा गया है कि प्रदेश के ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता के निधन एक मार्च से तीस जून तक कोरोना संक्रमण या किसी कारण से हुआ है। ऐसे 21 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों को विभाग सरकारी और अनुदानित कालेज और विवि के यूजी कोर्स में निशुल्क प्रवेश देगा। इसमें उन्हें वार्षिक शुल्क, मैस के भुगतान के अलावा कॉशनमनी तक में राहत दी जाएगी। अध्ययनरत होने की स्थिति में विद्यार्थी की आयु 24 वर्ष तक पात्र मानी जाएगी। वहीं निजी विश्वविद्यालय और कालेजों की फीस का निर्धारण प्रवेश एवं फीस विनियाम समिति द्वारा किया जाता है। ऐसे कालेजों की फीस या 15 हजार जो भी कम हो। उसका भुगतान बाल हितग्राही के आधार लिंक बैंक खाते में की जाएगी। तीसरी लहर के बाद विभाग अपनी आगामी सत्र में कुछ नये प्रावधान जोड रहा है।  

 

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