शहबाज शरीफ के लिए पैतृक गांव में ‘चढ़दी कलां’ के लिए हुई प्रार्थना

जाती उमरा
पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे शहबाज शरीफ के लिए दुआएं की जा रही हैं। उनके पैतृक गांव जाती उमरा में ग्रामीणों ने रविवार को स्थानीय गुरुद्वारा में 'चढ़दी कलां' के लिए पूजा की। रविवार को नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद इमरान खान को सत्ता गंवानी पड़ी थी। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि शरीफ मुल्क के अगले वजीर-ए-आजम बन सकते हैं। आजादी से पहले शरीफ का परिवार यहां से चला गया था, लेकिन वे हमेशा स्थानीय लोगों के संपर्क में रहे। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, शरीफ परिवार ने यहां लोगों को खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने में भी मदद की है। साथ ही उन्होंने गांव के कई लोगों को दुबई स्थित अपनी फैक्ट्री में काम पर रखा है। पाकिस्तान में विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार शहबाज के नामांकन दस्तावेज स्वीकार कर लिए गए हैं।

डॉक्टर दिलबाग सिंह बताते हैं कि ग्रामीण गुरुद्वारा कालगिदार साहिब पर जुटे और उनकी चढ़दी कलां के लिए प्रार्थना की। खास बात है कि गुरुद्वारा जिस जमीन पर बना हुआ है वह कभी शरीफ परिवार की थी। सिंह के पिता दिवंगत मस्सा सिंह, शहबाज के पिता मियां मोहम्मद शरीफ के दोस्त थे। शहबाज पाकिस्तान के तीन बार के पीएम नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं।  पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ ने रविवार को प्रधानमंत्री पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। यह घटनाक्रम इमरान खान को शनिवार देर रात अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद हुआ है, जो देश के इतिहास में सदन का विश्वास खोने के बाद सत्ता गंवाने वाले पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं।

 

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