अब रात के अंधेरे में भी नहीं बच पाएगा दुश्मन! ट्रिपल आईटी ने डीआरडीओ को भेजी तकनीक
प्रयागराज
अब भारतीय सेना रात के अंधेंरे में भी दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रख सकेगी। इसके लिए ट्रिपल आईटी ने आधुनिक डीप-लर्निंग कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित नई तकनीक विकसित की है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जवान सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे। यह अहम शोध दो साल में पूरा कर संस्थान के वैज्ञानिकों ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को भेज दिया है। इस तकनीक से बेहद कम रोशनी में या यूं कहें कि अंधेरे में घटित होने वाले आपराधिक कृत्यों की साफ सुथरी तस्वीर मिल सकेगी। इस तकनीक को विजुअल सर्विलांस प्रक्रिया में भी प्रयोग लाया जा सकता है। देश की सुरक्षा एंजेसियों की इस तकनीक से सुरक्षा संबंधी मसलों को हल करने में काफी मदद मिलेगी। संस्थान के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर सतीश कुमार सिंह ने बताया कि इस तकनीक को विकसित करने के लिए डीआरडीओ की ओर ग्रांट मिली थी।
गहरी रात के परिदृश्य में भी दिन के उजाले का होगा आभास
डॉ. सिंह ने बताया कि ट्रिपल आईटी के वैज्ञानिकों ने अपने प्रयासों से नाइट विजन तकनीक विकसित की। इस तकनीक के उपयोग से बहुत गहरी रात के परिदृश्य में भी दिन के उजाले का दृश्य वातावरण बनाना संभव है। अनिवार्य रूप से प्रौद्योगिकी अपनी दृष्टि की सीमा के तहत सभी जीवित और निर्जीव वस्तुओं के थर्मल हस्ताक्षर को पकड़ने और आभासी दृश्य को फिर से बनाने (रीक्रिएट) के लिए बहुत परिष्कृत संवेदन विधियों का उपयोग कर रही है। जैसे कि रात्रि के दृश्य को तेज धूप में कैद किया गया हो। विकसित तकनीक उपयोगकर्ताओं की ओर से अपने आसपास के अज्ञात इलाके में पर्यावरण को समझने में बहुत मददगार होगी।
