पश्चिमी भारत की धूप और गर्म हवाओं से झारखंड को मिल रही ठंडक

रांची
पश्चिमी भारत की धूप और गर्म हवाओं से झारखंड को ठंडक मिल रही है और खजाना भी बच रहा है। राज्य में बिजली का अपना उत्पादन टीवीएनएल से करीब 350 मेगावाट हो रहा है, लेकिन मांग चिलचिलाती गर्मी में अब तक का सर्वाधिक 1800 से 2000 मेगावाट (डीवीसी कमांड एरिया के अलावा) रिकॉर्ड किया जा रहा है। इस स्थिति में भी राज्य में बिजली आपूर्ति लगभग सामान्य देखी जा रही है। ऐसा पश्चिम भारत के राज्य गुजरात से सस्ती दर पर सौर और पवन ऊर्जा की उपलब्धता से मुमकिन हो रहा है।

300 MB सौर उर्जा और  80-15 MB पवन उर्जा की आपूर्ति
दिन के समय करीब 300 मेगावाट सौर ऊर्जा की आपूर्ति हो रही है, जबकि रात के वक्त 80 से 150 मेगावाट पवन ऊर्जा की उपलब्धता है। राज्य को सौर और पवन ऊर्जा की आपूर्ति झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) की ओर से सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) के बीच हुये करार के तहत हो रही है। सौर ऊर्जा 2.5 रुपये और पवन ऊर्जा 2.6 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिल रही है, जबकि परंपरागत बिजली 4.40 रुपये प्रति यूनिट की दर पर उपलब्ध है। इस प्रकार नवीकरणीय ऊर्जा से प्रति यूनिट 1.90 रुपये की बचत हो रही है।

राज्य में बिजली की मांग 1800 से 2000 मेगावाट पहुंच गई है। टीवीएनएल से करीब 350 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। राज्य में निजी क्षेत्र की उत्पादन इकाइयों आधुनिक और इनलैंड पावर से 230 मेगावाट बिजली मिल रही है। जेबीवीएनएल मांग और आपूर्ति के अंतर को विभिन्न माध्यमों जैसे सेंट्रल ग्रिड, एनटीपीसी से करीब 4.30 से 4.40 पैसे प्रति यूनिट की दर पर खरीद कर पूरा करता है। डीवीसी कमांड एरिया के सात जिलों में बिजली की मांग 600 मेगावाट से अधिक देखी जा रही है, यह उपरोक्त मांग के अतिरिक्त है। जेबीवीएनएल और सेकी के बीच जुलाई 2018 में 700 मेगावाट सौर ऊर्जा के लिये हुये समझौतों के तहत जनवरी माह से झारखंड को केवल 2.5 रुपये प्रति यूनिट की दर से 300 मेगावाट सौर ऊर्जा मिलनी शुरू हो गई है। इसी प्रकार 300 मेगावाट पवन ऊर्जा भी उपलब्ध हो रही है। फिलहाल 2.6 रुपये की औसत दर पर 80 से 150 मेगावाट पवन ऊर्जा रात के वक्त उपलब्ध है। इन माध्यमों से उपलब्धता के बावजूद 200 से 300 मेगावाट के अंतर को दूर करने के लिये इंडियन एनजी एक्सचेंज से अधिकतम 12 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदी जा रही है।

पिछली गर्मी की तरह नहीं बने लोड शेडिंग के हालात
स्टेट लोड डिस्पैच्ड सेंटर (एसएलडीसी) के महाप्रबंधक मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक सौ ऊर्जा और पवन ऊर्जा की उपलब्धता के कारण राज्य में पिछली गर्मी की तरह लोड शेडिंग के हालात नहीं बन रहे हैं, जबकि बिजली की मांग सर्वाधिक स्तर पर जा पहुंची है। पिछली गर्मी बिजली की मांग 1400 मेगावाट रही। तब चार से पांच घंटे की लोड शेडिंग से हालात बिगड़े थे। इस बार एक से डेढ़ घंटे तक की शेडिंग की नौबत बनते ही अतिरिक्त बिजली का प्रबंध कर लिया जाता है। स्थानीय खराबियों की बात अलग है। पिछले दिनों टीवीएनएल, आधुनिक और इनलैंड पावर में उत्पादन प्रभावित होने पर अस्थाई रूप से समस्या उत्पन्न हुई थी, लेकिन अब लोड शेडिंग की नौबत बहुत कम बन रही है।

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