कश्मीरी पंडितों का पलायन: सुब्रमण्यम स्वामी ने किया फारूक अब्दुल्ला का बचाव, बोले- वीपी सिंह का किया धरा

 नई दिल्ली

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कश्मीरी पंडितों के पलायन का जिम्मेदार तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह को बताया है। इस दौरान उन्होंने तब गृहमंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद का भी जिक्र किया। खास बात है कि इस दौरान  उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला का बचाव किया है। स्वामी का बयान ऐसे समय पर आया है, जब बॉलीवुड फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को लेकर सियासी तनाव जारी है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी लोगों से फिल्म देखने की अपील कर रही है। वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी कई विपक्षी दल इसपर विरोध जाहिर कर चुके हैं।

स्वामी ने यहां जम्मू-कश्मीर पीस फोरम द्वारा आयोजित अंतर-सामुदायिक सांस्कृतिक उत्सव 'नवरेह मिलन' के अवसर पर कहा, 'मुसलमान और पंडित एक जैसे हैं। उनमें एक सा खून है। यदि डीएनए जांच की जाए तो परिणाम एक जैसा ही आएगा। (कश्मीरी पंडितों के साथ) अन्याय हुआ है, ऐसा आप ही खुद कह रहे हैं। पूरा दोष फारूक अब्दुल्ला पर डाला जा रहा है, लेकिन यह वी. पी. सिंह और मुफ्ती (मोहम्मद) सईद का किया धरा था।' भाजपा नेता ने सईद की बेटी रूबिया सईद के 'अपहरण' की घटना को याद करते हुए कहा कि आज तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उसका (रूबिया का) अपहरण कैसे हुआ? उन्होंने कहा कि रूबिया की रिहाई के लिए सरकार को जेकेएलएफ के कुछ गिरफ्तार आतंकवादियों को रिहा करना पड़ा था।
    
उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं समझ आया कि यह सब कैसे हुआ? क्योंकि जब मैं चंद्रशेखर की सरकार में मंत्री था, तब भी जेकेएलएफ के आतंकवादियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के तत्कालीन सांसद सैफुद्दीन सोज की बेटी को भी अगवा कर लिया था, लेकिन हमने एक भी व्यक्ति को रिहा नहीं किया था। बाद में सोज की बेटी को जेकेएलएफ द्वारा एक ऑटो-रिक्शा में उसके घर छोड़ दिया गया था।'

इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का समर्थन मिला था, जिन्होंने यह कहते हुए अब्दुल्ला का बचाव किया कि उन्होंने सईद की बेटी की रिहाई के बदले आतंकवादियों को रिहा किए जाने के निर्णय का विरोध किया था।

हालांकि, इस सवाल के जवाब में कि क्या 'द कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्मों को प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए, उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में किसी फिल्म को कैसे रोका जा सकता है? (यदि नहीं पसंद है तो) आप बहिष्कार कीजिए।' अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बारे में पूछे गए एक सवाल में स्वामी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता को यह 'भूल' जाना चाहिए कि विशेष प्रावधानों वाला यह अनुच्छेद फिर से लौटेगा।

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