सरकार ने मांगी परियोजनाओं की रिपोर्ट, लैप्स हो रही राशि सरेंडर करे निर्माण एजेंसियां

भोपाल
राज्य सरकार ने प्रदेश के सरकारी महकमों से उन विभागीय योजनाओं, परियोजनाओं की राशि खर्च का ब्यौरा मांगा है जिनके लिए शासन की ओर से दी गई राशि का उपयोग जिलों में नहीं किया जा सका है। वित्त विभाग को इन रिपोर्ट्स के माध्यम से जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं कि किस परियोजना अथवा योजना में कितनी राशि खर्च नहीं हो सकी है। जिला अधिकारियों को दिए निर्देश में विभागों ने उपयोग न हो पाने वाली राशि तुरंत सरेंडर करने को कहा है ताकि 31 मार्च के पहले उसका उपयोग दूसरे जिलों में आवश्यकता के आधार पर किया जा सके। अफसरों का मानना है कि अब तक कम से कम एक हजार करोड़ रुपए का उपयोग जिलों में विभाग नहीं कर सके हैं जिसका उपयोग सरेंडर कराने के बाद करने की कोशिश की जा रही है।

वित्त वर्ष समाप्ति का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और 48 घंटे से भी कम समय में शासन की अलग-अलग योजनाओं में हजारों करोड़ रुपए खर्च नहीं किए हो सके हैं। इन हालातों को देखते हुए राज्य शासन के वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा है कि वे अपने विभाग की एक अप्रेल को लैप्स होने वाली राशि को सरेंडर कराएं और इसकी जानकारी विभाग को दें। वित्त विभाग के निर्देशों के मद्देनजर जल संसाधन, लोक निर्माण, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, नगरीय विकास, पंचायत और ग्रामीण विकास और उसके उपक्रम, अजा-अजजा और पिछड़ा वर्ग कल्याण से संबंधित विभागों के साथ उन सभी विभागों ने इसकी रिपोर्ट जुटाने का काम दो दिन से शुरू कर रखा है जिनके यहां निर्माण परियोजनाओं और योजनाओं के लिए जारी की गई राशि का उपयोग 31 मार्च तक नहीं हो सकने की स्थिति है। विभागों ने इसको लेकर जिला अधिकारियों को पत्र भी लिखे हैं और परियोजनावार खर्च राशि और शेष राशि का विवरण मांगा है। साथ ही खर्च न हो पाने वली रकम को सरेंडर करने के लिए कहा है ताकि अगर किसी दूसरे जिले को जरूरत हो तो 31 मार्च के पहले उस जिले को आवश्यक राशि योजना, परियोजना क्रियान्वयन के लिए दी जा सके और अगर जरूरत न हो तो लैप्स होने के पहले वित्त विभाग को सरेंडर की जा सके।

उपयोगिता प्रमाण पत्र भी मांगे
विभागों ने सरकार की योजनाओं पर अमल के लिए दी गई राशि के उपयोग के बाद उसके उपयोगिता प्रमाण पत्र भी मांगे हैं। इन उपयोगिता प्रमाण पत्रों के आधार पर विभागों के मुख्यालय एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष के लिए जिलों को राशि का आवंटन करेंगे। इसके साथ ही उपयोगिता प्रमाण पत्र की डिमांड केंद्र सरकार को भी योजनाओं के क्रियान्वयन पर अमल के लिए होती है और कैग द्वारा किए जाने वाले आडिट में भी इसकी जांच होती है।

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