जम्मू-कश्मीर में परिसीमन अलग से क्यों? सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका, बताया संविधान के खिलाफ
नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा और लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच परिसीमन का विरोध भी तेज हो गया है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि यह प्रक्रिया समानता के अधिकार के खिलाफ है, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संविधान के तहत मिला है। याचिका में कहा गया है कि देश भर में 2026 तक परिसीमन पर रोक लगी है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर का अलग से परिसीमन किए जाने की कोई वजह नहीं है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने और राज्य को पुनर्गठित कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के खिलाफ भी अर्जी दायर की गई है, जिस पर सुनवाई होनी बाकी है।
जम्मू कश्मीर के निवासियों हाजी अब्दुल गनी खान और डॉ. मोहम्मद अयूब मट्टू की ओर से दायर अर्जी में सवाल किया गया है, 'जब संविधान के अनुच्छेद 170 के मुताबिक पूरे देश में परिसीमन 2026 के बादद होना है तो फिर जम्मू-कश्मीर में अलग से प्रक्रिया क्यों हो रही है।' यही नहीं अर्जी में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की सीटों को 83 से बढ़ाकर 90 किए जाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है। याचिका में शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि वह परिसीमन आयोग के गठन को ही असंवैधानिक करार दे क्योंकि यह नियमों के खिलाफ जाकर बना है।
अर्जी में कहा गया है कि आखिरी बार परिसीमन आयोग का गठन 12 जुलाई, 2002 में किया गया था। 2001 की जनगणना के आधार पर यह काम हुआ था और उसमें यह निर्धारित किया गया था कि अब 2026 के बाद ही यह प्रक्रिया होगी। गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में फिलहाल परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है और जून तक इसे पूरा करने की कोशिश है। कहा यह भी जा रहा है कि परिसीमन की प्रक्रिया के बाद इस साल के अंत तक या फिर 2023 की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं।
