फिर “गेर” ने इतिहास रचा ,यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर में शामिल प्रस्ताव

इंदौर
 इंदौर की रंगपंचमी ने इस बार फिर इतिहास रचा है, पिछले दो साल कोरोना संक्रमण के चलते इंदौर की प्रसिद्ध गेर नहीं निकाली गई थी लेकिन इस साल निकाली गई गेर ने इतिहास रच दिया, करीबन 5 लाख से ज्यादा हुरियारे इस गेर में शामिल हुए, इस साल गेर में न सिर्फ इंदौर बल्कि बाहर से आए लोगों ने भी इस शानदार नज़ारे को देखा, खास बात यह है कि इस साल गेर में जुटी भीड़ को देखते हुए इसे यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर में शामिल करने की चर्चा जोरों पर थी, इस शानदार और सफल आयोजन के बाद अब जिला प्रशासन ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। दरअसल गेर में 5.50 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए जो अपने आप में रिकॉर्ड है। इसमें बाहर से भी लोग शामिल हुए थे। इन बिंदुओं के आधार पर जिला प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार किया है। 31 मार्च को यह प्रस्ताव संस्कृति मंत्रालय को सौंपा जाएगा।

इंदौर में रंगपंचमी पर गेर निकालने की परम्परा 74 साल पुरानी हैं। बताया जाता हैं कि ये परम्परा आजादी के पहले से ही चलन में हैं। खासकर होल्कर राजवंश से शुरू हुई यह परंपरा आज न सिर्फ इंदौर बल्कि मध्यप्रदेश की पहचान बन गई। रंगपंचमी पर निकलने वाली यह गेर हर वर्ष राजवाड़ा से शुरू होती हैं और निश्चित मार्ग से होती हुई राजवाड़ा पर ही खत्म होती हैं।

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