‘मस्जिदों से गूंजता था- रलिव, चलिव या गलिव’, कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार की दर्दनाक कहानी, कश्मीरी मुसलमान जावेद बेग की जुबानी

नई दिल्ली।

विवेक अग्निहोत्री की 'द कश्मीर फाइल्स' को लेकर जहां लोग बंटे हुए हैं, वहीं कश्मीरी युवा नेता जावेद बेग ने फिल्म को लेकर कहा है कि इसमें कुछ भी झूठ नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ यह फिल्म ही सच नहीं है, कश्मीरी हिंदुओं के साथ हुए अन्याय के और भी कई सच हैं, उनपर भी फिल्म बननी चाहिए। लाइव हिंदुस्तान से बातचीत में कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (सेक्युलर) के महासचिव जावेद बेग ने कहा, 'मैं उसवक्त बहुत छोटा था, सब मेरी आंखों के सामने हुआ। हम एक सोसाइटी के तौर पर फेल हुए, हमारी जिम्मेदारी थी कि हम उन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करते।' उन्होंने कहा कि उन लोगों को मारने वाले सभी लोग कश्मीरी मुसलमान नहीं थे, लेकिन कश्मीरी मुसलमान उन्हें बचा नहीं पाए और इसलिए हमें, हर मुसलमान को उनसे माफी मांगनी चाहिए।

'पाकिस्तानी दहशतगर्दों को मिला कश्मीर में संरक्षण'
बेग ने कहा, उस दौर में जिन्होंने कश्मीरी पंडितों के साथ ज्यादती की, वे यहीं कश्मीर के लोग थे, यहीं के मुसलमान थे। जिन लोगों ने वो सब किया उनमें से आज भी कुछ लोग जिंदा हैं, हमें मानना चाहिए कि गलती हुई है। उन्होंने कहा, 'यह गलती मानने के लिए किसी कश्मीर फाइल्स की जरूरत नहीं है, इसके लिए बस जरूरत है इंसानियत की।' उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी दशहतगर्दों को संरक्षण यहीं के लोगों ने दिया और फिर कश्मीरी हिंदुओं पर ये अत्याचार हुए।
 
'रलिव, गलिव या चलिव' पर यह बोले जावेद
जावेद ने कहा, 'कश्मीरी पंडितों ने अपना सबकुछ खोया। वो सालों तक परेशान रहे, आज भी हैं लेकिन इतनी परेशानियों के बाद भी आज कश्मीरी पंडित भाई पूरी दुनिया में कश्मीर का नाम रोशन कर रहे हैं। इतना कुछ झेलने के बाद भी उन्होंने कभी गलत रास्ता नहीं पकड़ा, कभी बंदूक नहीं उठाई। वो आज भी कश्मीरी मुसलमान बच्चों की मदद करते हैं। मैं जब बाहर पढ़ने गया तो मुझे बेटे और भाई की तरह कश्मीरी पंडितों ने पढ़ाया।' 'रलिव, चलिव या गलिव' उन्होंने कहा कि मैंने खुद ये नारे सुने थे। उन्होंने कहा, 'मस्जिदों से ये नारे दिए जाते थे, लेकिन जो जाहिल ये नारे देते थे, वे इस्लाम के खिलाफ थे। हम बार-बार इसकी मजम्मत करते रहेंगे।' 

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