रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर LAC गतिरोध तक… जानें जापानी प्रधानमंत्री के संग PM मोदी ने की क्या-क्या बात

नई दिल्ली।
भारत ने शनिवार को पूर्वी लद्दाख में सीमा पर चीन के साथ जारी गतिरोध की जानकारी जापान को दी और बताया कि जब तक इलाके में शांति स्थापित नहीं हो जाती बीजिंग के साथ रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते। चौदहवें भारत-जापान शिखर सम्मेलन के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा की हुई बातचीत के दौरान चीन की दक्षिण और पूर्वी सागर में हठधर्मिता सहित अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मीडिया को बैठक की जानकारी देते हुए विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने बताया कि भारत ने जापानी प्रतिनिधिमंडल को पूर्वी लद्दाख की स्थिति के साथ-साथ चीन द्वारा सैनिकों के किए गए जमावड़े और इलाके में कई बार घुसपैठ की कोशिशों से भी अवगत कराया गया।

उन्होंने कहा, ‘हमने स्पष्ट कर दिया कि जब तक मामले का समाधान नहीं हो जाता और सीमावर्ती इलाके में शांति स्थापित नहीं हो जाती, तब तक हम रिश्तों को सामान्य नहीं समझ सकते हैं। रिश्तों में समान्य स्थिति इस मुद्दे में होने वाली प्रगति पर निर्भर करेगी जिस पर हम चर्चा कर रहे हैं।’ उल्लेखनीय है कि भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में उत्पन्न गतिरोध पर सैन्य स्तर की वार्ता कर रहे हैं।

मोदी ने जापानी पीएम को कृष्ण पंखी उपहार में दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा को कृष्ण पंखी उपहार में दिया। ये चंदन की लकड़ी से बना है और इसके किनारों पर कलात्मक आकृतियों के माध्यम से भगवान कृष्ण की विभिन्न मुद्राओं को दर्शाया गया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पंखी को पारंपरिक उपकरणों के जरिए उकेरा गया है और इसके शीर्ष पर हाथ से नक्काशी कर तैयार की गई मोर की आकृति है जोकि भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। इस कृष्ण पंखी का निर्माण राजस्थान के चुरु में कुशल कारीगरों द्वारा किया गया है। यह कलाकृति शुद्ध चंदन की लकड़ी से बनी है जोकि मुख्य रूप से भारत के दक्षिणी भागों के जंगलों में मिलती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जड़े हिल गई: किशिदा
जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने शनिवार को यूक्रेन पर रूस के हमले को ‘बहुत गंभीर’ मामला करार देते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जड़े हिल गई हैं। प्रधानमंत्री किशिदा ने यह टिप्पणी 14वें भारत-जापान शिखर वार्ता के बाद मीडिया से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में की। सम्मेलन के बाद यहां जारी संयुक्त बयान में मोदी और किशिदा ने यूक्रेन में हिंसा पर तत्काल रोकने का आह्वान किया और विवाद का समाधान बातचीत के जरिये निकालने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने यूक्रेन के परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया। किशिदा ने संवादाताओं से कहा, हमने यूक्रेन की स्थिति पर चर्चा की। यूक्रेन पर रूस का हमला गंभीर मुद्दा है और इसने अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की जड़े हिला दी हैं। हमें इस मामले को मजबूत संकल्प के साथ देखने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, मैंने मोदी से कहा कि एकतरफा तरीके से बल के जरिये यथास्थिति को बदलने की कोशिश को किसी भी क्षेत्र में अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हम दोनों सभी विवादों का अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करने की जरूरत पर सहमत हुए हैं। संयुक्त बयान में कहा गया कि मोदी और किशिदा ने हिंसा को तुरंत रोकने के अपने आह्वान को दोहराया और रेखांकित किया कि संवाद और कूटनीति के अलावा विवाद को सुलझाने का कोई रास्ता नहीं है। उल्लेखनीय है कि यूक्रेन पर हमले को लेकर जापान रूस का मुखर आलोचक रहा है, जबकि भारत विवाद का समाधान सवांद और कूटनीति से करने पर जोर दे रहा है।

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