बांदा में कांग्रेस प्रत्याशी को नोटा से भी काम वोट मिले

बांदा
 यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा है। बांदा जिले में जहां पार्टी के चारों प्रत्याशी जमानत बचाने में नाकाम रहे तो वहीं 39 में से 21 प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले है। इनमें कांग्रेस का भी एक प्रत्याशी शामिल है। बांदा विधानसभा जहां 2017 तक कांग्रेस की तूती बोलती थी, वहां प्रत्याशी को 2000 वोट भी नहीं मिले।

नोटा में 8111 वोट पड़े
निर्वाचन आयोग ने कोई भी प्रत्याशी पसंद न होने पर नोटा का विकल्प दिया है। चारों विधानसभा क्षेत्रों में इस बार नोटा में कुल 8111 वोट पड़े। इनमें सर्वाधिक नरैनी में 3420, तिन्दवारी में 2267, बांदा में 1598, बबेरू में 826 वोट नोटा पर पड़े। नोटा में पड़े वोटों से भी कम कांग्रेस की एक प्रत्याशी को मत मिले।

लड़की हूं लड़ सकती हूं नारा फेल
जिले की चारों सीटों में कांग्रेस बेहद फिसड्डी साबित हुई। इससे ज्यादा नोटा और छिटपुट दलों के प्रत्याशियों को वोट मिले, जबकि कांग्रेस ने चारों सीटों में दो महिलाओं और दो पुरुष प्रत्याशियों को टिकट दिया था। इस बार चुनाव में तिंदवारी से कांग्रेस की प्रत्याशी आदिशक्ति दीक्षित को महज 2586 वोट मिले, जबकि नरैनी से पवन देवी को 1806, बांदा सदर सीट से लक्ष्मी नारायण गुप्ता को 1894 और बबेरू से कांग्रेस के गजेंद्र सिंह पटेल को 2112 मत मिले।

कांग्रेस सहित 21 उम्मीदवार नोटा से पिछड़े
चुनाव में नोटा बटन खूब इस्तेमाल किया गया। आलम यह है कि जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के एक प्रत्याशी सहित 21 उम्मीदवार नोटा में पड़े वोटों से पीछे रह गए। सबसे ज्यादा नोटा का बटन नरैनी (सुरक्षित) सीट में इस्तेमाल हुआ। नोटा में पड़े वोटों से कई धुरंधर पीछे रह गए। इनमें बांदा सदर व तिंदवारी सीट में 4-4, नरैनी में 5 और बबेरू में 8 प्रत्याशी शामिल हैं।

बांदा सदर में देवनाथ यादव 1550, गुलाबचंद्र कुशवाहा 990 व राम प्रसाद सिंह 915, नरैनी (सुरक्षित) में पवन देवी (कांग्रेस) 1806, राधेश्याम (आप) 662, दयाराम 2550, रितेश कुमार 973 व लवलेश (असपा) 1320, बबेरू में डॉ. रामचंद्र सरस 1589, जगरूप भाष्कर 585, जयपाल 504, जियालाल धुरिया 804, राजबहादुर कुशवाहा 749, समता देवी 817 व सिम्मी बर्मन 1944 और तिंदवारी में मधुराज 1082, अरविंद कुमार 1035, मूलचंद्र 913 व उत्तम 821 शामिल हैं।

कभी बांदा सदर में था कांग्रेस का बोलबाला
80 के दशक में बांदा की चारों विधानसभा सीटों में कांग्रेस का बोलबाला था। इसके बाद कांग्रेस का वोट बैंक नीचे खिसकता चला गया। इसी दौरान 1996 में कांग्रेस व बसपा गठबंधन होने से एक बार फिर कांग्रेस का वोट बैंक बढ़ने लगा। 1996, 2002, 2007 और 2012 में विवेक सिंह ने बांदा विधानसभा सीट से लगातार जीत दर्ज की और 2017 में चुनाव हार गए, तब भी उन्हें लगभग 36000 वोट मिले। इस बार उनकी पत्नी सपा से चुनाव लड़ी, जिन्हें 66343 वोट मिले और कांग्रेस को मात्र 1804 वोट मिले। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां से कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया है।
 

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