एनएलआइयू में यौन शोषण के आरोप में प्रोफेसर को देना पड़ा इस्तीफा
भोपाल
राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (एनएलआइयू) के करीब 500 से अधिक विद्यार्थियों ने यौन शोषण का आरोप लगाते हुए प्रोफेसर तपन रंजन मोहंती के केबिन के बाहर घेराव कर दिया। विद्यार्थी जोर-जोर से प्रोफेसर के खिलाफ नारे लगाने लगे। मामले की जानकारी एनएलआइयू के कुलपति और रजिस्ट्रार को मिली तो दोनों प्रोफेसर के पास पहुंचे। विद्यार्थियों ने एक सुर में प्रोफेसर को हटाने की मांग की। विद्यार्थी मांग करने लगे कि प्रोफेसर तुरंत इस्तीफा दें, तभी वे लोग यहां से जाएंगे।
विद्यार्थियों ने कहा कि करीब 100 छात्राओं के साथ यौन शोषण का आरोप प्रोफेसर के ऊपर हैं। वे अभी इस्तीफा दें। इसके बाद विवि के कुलपति ने प्रोफेसर से इस्तीफा मांगा। इसके बाद 23 साल से पदस्थ प्रोफेसर को इस्तीफा देना पड़ा। बता दें कि पीड़ित छात्राओं से शोषण के आरोप की शिकायत प्रबंधन तक पहुंच गई थी। प्रबंधन ने जांच कर प्रोफेसर मोहंती को दोषी मानते हुए कार्रवाई की है।
पीड़िताओं ने प्रबंधन से मांग की है कि अब जिला न्यायाधीश से पूरे मामले की जांच कराई जाए। बता दें कि इससे पहले भी एनएलआइयू की डिग्रियों में किए गए फर्जीवाड़ा का मामला प्रोफेसर पर लग चुका है। विद्यार्थियों का कहना है कि आफलाइन कक्षाओं के दौरान तो प्रोफेसर अकेले में छात्राओं को बुलाते थे। इसके बाद अश्लील मैसेज और वीडियो छात्राओं को भेजते थे, जो छात्राओं के पास सबूत के तौर पर मौजूद हैं।
सभी फैकल्टी सदस्यों के सामने पीड़ित छात्राओं ने उन्हें बताया कि प्रो. मोहंती उनके साथ कैसे मैसज और कमेंट्स भेजते थे। इस दौरान प्रो. मोहंती छात्राओं के आरोपों को झुठलाते रहे। इसके बाद कुलपति वीरभद्र विजयकुमार ने एनएलआइयू की छवि को बचाते हुए प्रो. मोहंती को कहा कि वे इस्तीफा दे नहीं तो दूसरे विकल्प के तौर पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद तत्काल प्रो. मोहंती ने इस्तीफा दे दिया, जिससे तत्काल कुलपति ने स्वीकृत कर दिया है।
विद्यार्थियों ने कहा-एफआईआर कराएंगे दर्ज
विद्यार्थियों का कहना है कि छात्राओं ने मांग कि है प्रो. मोहंती के मामले की जांच भोपाल की जिला न्यायाधीश गिरीबाल सिंह से कराई जाए, क्योंकि वे पूर्व में एनएलआइयू में रजिस्ट्रार रह चुकी हैं। साथ ही विवि के डिग्री में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में भी कार्रवाई होना शेष है।
यह था मामला
एनएलआइयू में विद्यार्थियों और विवि प्रबंधन की बैठक रखी गई थी। इसमें विद्यार्थियों ने प्रोफेसर का नाम लिए बिना यौन शोषण की शिकायत की थी, लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रोफेसर ने महिला सशक्तिकरण पर आलेख लिख दिया तो छात्राओं ने उनका विरोध करते हुए प्रोफेसर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
