कांग्रेस का शासनकाल अफसरशाही और भ्रष्टाचार-कमीशनखोरी का कलंकित दस्तावेज बन गया है – साय
रायपुर
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा है कि शासन-प्रशाासन में तालमेल और पारदर्शिता नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार के एक मंत्री सार्वजनिक तौर पर कलेक्टर को चेतावनी दे रहे हैं, कांग्रेस के लोग अपनी ही सरकार के मंत्री पर तबादले के नाम पर उगााही का खुलेआम आरोप लगा रहे हैं, कांग्रेस के जनप्रतिनिधि और नेता सरकारी अफसरों से बदसलूकी कर रहे हैं। साय ने कटाक्ष किया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भाजपा पर शासन-प्रशासन नहीं चला पाने का ताना मारते थे, अब न तो घोड़ा और न ही घुड़सवार उनके काबू में हैं। आखि? शासन-प्रशासन की यह भूपेश-शैली छत्तीसगढ़ को और कितना शर्मसार करेगी?
साय ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने के दावे करती प्रदेश की कांग्रेस सरकार और उसकी प्रशाासनिक मशीनरी भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ धँसी नज? आ रही है। प्रशासनिक अधिकाारियों के आचरण ने प्रदेशभर में न केवल भ्रष्टाचार के तमाम रिकॉर्ड तोड?े का काम किया है, अपितु जनकल्याण और जनसुविधा के कामों में उनकी अड़ंगेबाजी ने छत्तीसगढ़ के विकास को अवरुद्ध किया है। साय ने सवाल किया कि आखि? इस अधिकारी राज के लिए जिम्मेदार प्रदेश सरकार अब अफसरशाही पर तिलमिला क्यों रही है? क्या मंत्री और अफसरों में तक?ार भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी में अपने-अपने हिस्से को लेकर मच रही है? साय ने कहा कि इस बात की जाँच होनी चााहिए कि एसईसीएल द्वारा राशि जारी होने के बाद भी कोरबा कलेक्टर ने हरदीबाजार-तरदा और सर्वमंगला-इमलीछापर सड़क निर्माण की दूसरी किश्त का भुगतान क्यों रोक रखा है जिसके चलते सड़क निर्माण का काम ठप है।
उन्होंने यह कहकर कि, प्रदेश में कांग्रेस का शासनकाल अफसरशाही और भ्रष्टाचार-कमीशनखोरी का कलंकित दस्तावेज बन गया है, सवाल दागा कि जिस सरकार के मंत्रियों पर उनके ही दल के लोग अवैध उगााही के आरोप सरेआम लगाकर कठघरे में खड़े कर रहे हों, उस सरकार के एक मंत्री का कलेक्टर के खिलाफ इस तरह मोर्चा खोलना कहीं हिस्से को लेकर पर्दे के पीछे छिड़ी जंग का परिणाम तो नहीं है? साय ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के अपने कार्यकाल में कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने विकास के नाम पर एक धेले का भी काम नहीं किया है और जो काम जारी थे, उनमें या तो सरकार ने अड़ंगे लगाने का काम करके उन्हें बंद करा दिया या फिर नेता-अफसरों-ठेकेदारों की तिकड़ी ने सरकारी राशि की जमकर बंदरबाँट करके विकास के कामों को अपनी-अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना रखा है और 'अपने-अपने हिस्से को लेकर अब इस तरह की मोचार्बंदी खुलकर सामने आ रही है।
